देश की खबरें | न्यायालय ने मप्र विस अध्यक्ष से सदस्यों को अयोग्य घोषित करने के लिये लंबित याचिकाओं पर जानकारी मांगी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मप्र विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह अगले सप्ताह तक यह बतायें कि सत्तारूढ़ भाजपा के खेमे में शामिल होने वाले कांग्रेस के 22 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता के लिये दायर याचिकाओं पर कब तक फैसला लिया जायेगा।
नयी दिल्ली, 22 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मप्र विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह अगले सप्ताह तक यह बतायें कि सत्तारूढ़ भाजपा के खेमे में शामिल होने वाले कांग्रेस के 22 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता के लिये दायर याचिकाओं पर कब तक फैसला लिया जायेगा।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कांग्रेस के विधायक विनय सक्सेना की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अध्यक्ष को सिर्फ यह वक्तव्य देना है कि इन आवेदनों पर कब फैसला लिया जायेगा।
इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि इन सदस्यों को अयोग्य घोषित करने के लिये अध्यक्ष के पास 12 मार्च से ये याचिकायें लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता के लिये दायर याचिकाओं पर आदेश सुनाना है । ऐसा नहीं होने की वजह से वे राज्य सरकार में मंत्री पद पर काम करते रहेंगे।
तन्खा ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि अध्यक्ष एक सप्ताह के भीतर इन याचिकाओं पर निर्णय लें।’’
पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस मामले की सुनवाई स्थगित करने के लिये संबंधित पक्षों के बीच पत्र वितरित किया गया है।
विधानसभा सचिवालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें सोमवार की शाम को ही याचिका की प्रति मिली है और उन्हें इसका जवाब देने के लिये तीन सप्ताह का वक्त चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हम समय के लिये अनुरोध समझते हैं, लेकिन आपको सिर्फ यह बयान देना है कि इस पर कब फैसला होगा।
इस पर अधिवक्ता ने जवाब दिया कि वह अध्यक्ष की ओर से नहीं बल्कि विधानसभा सचिवालय की ओर से पेश हुये हैं।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हमें विधानसभा और अध्यक्ष में कोई विशेष अंतर नजर नहीं आता।’’ इस पर सचिवालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने दो सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।
पीठ ने पेश अधिवक्ताओं से पूछा कि अध्यक्ष की ओर से कौन पेश हो रहा है।
एक अधिवक्ता ने कहा कि उसे अध्यक्ष की ओर से पेश होना था लेकिन सोमवार को उसे इससे मुक्त कर दिया गया।
पीठ ने इस मामले को अगले सप्ताह के लिये सूचीबद्ध करते हुये कहा कि अध्यक्ष को वक्तव्य देना चाहिए कि अयोग्यता संबंधी इन आवेदनों पर कब तक फैसला लिया जायेगा।
शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त को सक्सेना की याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय से जवाब मांगा था। सक्सेना की दलील थी कि भाजपा में शामिल होने के लिये इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधायकों को उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिकायें लंबित होने के दौरान शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
याचिका में मणिपुर मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया था कि अयोग्यता संबंधी कार्यवाही पर अध्यक्ष को तीन महीने के भीतर निर्णय करना होगा।
ये याचिकायें लंबित होने के दौरान ही भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेस के 22 में 12 विधायको को राज्य सरकार में मंत्री बना दिया गया है।
अनूप
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