देश की खबरें | अदालत ने आईटीबीपी कमांडेंट को अधीनस्थ अधिकारी के प्रति पूर्वाग्रह के लिए फटकार लगायी

नयी दिल्ली, 19 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईटीबीपी के एक बर्खास्त कमांडेंट द्वारा उसके कनिष्ठ के प्रति "अत्यधिक पूर्वाग्रह" और "प्रतिशोध की भावना" रखने के लिए नाराजगी जताने के साथ ही अर्धसैनिक बल को "उत्कृष्ट" रिकॉर्ड वाले अधीनस्थ अधिकारी की पदोन्नति पर विचार करने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की समीक्षा बैठक आयोजित करने का आदेश दिया है।

अदालत ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से नेतृत्व प्रदर्शित करने की अपेक्षा की जाती है और उन्हें अधीनस्थ अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक और संरक्षक होना चाहिए। अदालत ने कहा कि कमांडेंट के आचरण से अधीनस्थ अधिकारी, एक सहायक कमांडेंट के प्रति प्रतिशोध और द्वेष की बू आती है।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा, ‘‘हम सभी संबंधितों को सलाह देते हैं कि किसी भी अधीनस्थ अधिकारी/कर्मी के खिलाफ कार्रवाई करते समय, यह ध्यान में रखना होगा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यदि ऐसे आदेशों को अदालत के समक्ष चुनौती दी जाती है, तो अदालत दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने से निश्चित रूप से संकोच नहीं करेगी।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि फैसले की एक प्रति सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के महानिदेशकों को सूचना और सलाह के लिए भेजी जाए।

उच्च न्यायालय ने यह आदेश भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहायक कमांडेंट की एक याचिका पर पारित किया। उक्त याचिका में सहायक कमांडेंट ने 19 जून, 2014 और 8 नवंबर, 2014 के बीच की अवधि की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) को रद्द करने का अनुरोध किया था। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि उन्हें सभी परिणामी लाभों के साथ डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नत न करने के निर्णय की समीक्षा की जाए।

पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उसे जून 2014 और नवंबर 2014 के बीच की अवधि के लिए एपीएआर में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों का कोई औचित्य नहीं मिला और आदेश दिया कि उन्हें हटा दिया जाए।

उसने कहा, ‘‘प्रतिवादियों को डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नति के लिए याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने के लिए एक समीक्षा डीपीसी आयोजित करने का निर्देश भी दिया जाता है और उपयुक्त पाये जाने पर उसे उस तारीख से सभी परिणामी लाभों के साथ पदोन्नति दी जाए, जिस दिन उसके निकटतम कनिष्ठों को पदोन्नत किया गया था।’’

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