मुंबई, 29 मई बम्बई उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान शहर में दो वाडिया अस्पतालों को नियंत्रण में लेने की महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी को निर्देश देने के अनुरोध वाली अर्जी शुक्रवार को तब खारिज कर दी कि जब याचिकाकर्ता अपनी प्रमाणिकता साबित करने के लिए एक करोड़ रुपये की राशि जमा कराने में असफल रहा।
इससे पहले इस सप्ताह मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति के के तातेद की एक खंडपीठ ने पंजक फडनीस से कहा था कि वह अर्जी पर सुनवायी से पहले अपनी प्रमाणिकता दिखाने के लिए एक करोड़ रुपये की राशि जमा करें। याचिकाकर्ता ने अपने गैर पंजीकृत थिंकटैंक अभिनव भारत कांग्रेस के जरिये याचिका दायर की थी।
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अदालत ने शुक्रवार को कहा कि चूंकि फडनीस राशि जमा कराने में असफल रहे इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
याचिकाकर्ता ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका और राज्य सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वे कोविड-19 महामारी के बीच बाई जरबाई वाडिया बाल अस्पताल और मध्य मुंबई स्थित नौरोजी वाडिया मैटरनिटी हॉस्पिटल को नियंत्रण में ले लें।
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दोनों अस्पतालों और बीएमसी ने अर्जी का विरोध किया था और कहा था कि फडनीस वाडिया के पूर्व कर्मचारी हैं और उन्होंने अर्जी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दायर की है।
अदालत ने गत 26 मई को कहा था कि प्रथम दृष्टया हो सकता है कि अर्जी जनहित में दायर नहीं की गई हो बल्कि किसी गुप्त मंशा के तहत दायर की गई हो इसलिए याचिकाकर्ता की प्रमाणिकता संदिग्ध है।
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