देश की खबरें | अदालत ने पीएम केयर्स कोष में जमा राशि की जानकारी देने के लिये दायर याचिका खारिज की
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नागपुर, 27 अगस्त बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत (पीएम केयर्स)’ कोष में जमा कराई गई राशि की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देने के लिये दायर जनहित याचिका (पीआईएल) बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
इस परमार्थ न्यास का गठन केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के बीच किया था।
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न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस संबंध में मांगी गई सभी राहत से इनकार किया जाता है। यह याचिका वकील अरविंद वाघमारे ने दायर की थी।
अदालत ने कहा कि फंड के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद इसका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
पीठ ने कहा, ''फंड को एक परमार्थ न्यास के तौर पर पंजीकृत कराने और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी को इसका ऑडिटर नियुक्त किये जाने के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि यह मकसद पूरा हो चुका है। चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी ऑडिटर के तौर पर फंड के संतुलन और खातों के ऑडिट के लिये बाध्य होगी।''
याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि अदालत सरकार को कोष में जमा की गई राशि और खर्चे की जानकारी सरकारी वेबसाइट पर समय-समय पर देने का आदेश दे।
पीठ ने कहा कि पीएम केयर्स कोष पर लागू भारतीय न्यास अधिनियम किसी जानकारी को सार्वजनिक कराने का उद्देश्य प्राप्त करने के लिये एक प्रभावी तंत्र प्रदान करता है और याचिकाकर्ता (वाघमारे) इस तंत्र के तहत अपनी शिकायतों के निपटान के लिये स्वतंत्र हैं।
अदालत ने कहा कि कोष में दान स्वैच्छिक है, लिहाजा इसमें दान करना किसी के लिये अनिवार्य नहीं है।
पीठ ने कहा, ''अगर किसी व्यक्ति को दान किये जाने वाले अपने पैसों के इस्तेमाल को लेकर कोई संदेह है, तो उसे अधिकार है कि वह कोष में दान न दे।''
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि अदालत सरकार और इस न्यास को विपक्षी दलों के कम से कम दो सदस्यों की नियुक्ति या नामित करने का आदेश दे ताकि इस कोष की पारदर्शिता बनी रहे।
पीठ ने कहा, ''पीएम केयर्स कोष परमार्थ संस्था के रूप में पंजीकृत है, लिहाजा इसे इसके न्यास दस्तावेजों (ट्रस्ट डीड) के जरिये ही नियंत्रित किया जाएगा। अगर न्यास दस्तावेजों में विपक्षी दलों के सदस्यों को शामिल करने के लिये कोई प्रावधान नहीं है तो अदालत ऐसा करने के लिये निर्देश नहीं दे सकती। ''
इस न्यास की स्थापना कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में देश और विदेश के लोगों से आर्थिक मदद हासिल करके कोविड-19 प्रभावितों को मदद देने के लिए की गई है।
केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी। केंद्र ने कहा कि पीएम केयर्स न्यास को चुनौती देने वाली इस तरह की एक याचिका को उच्चतम न्यायालय खारिज कर चुका है।
वाघमारे ने अपनी याचिका में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम केयर्स न्यास के अध्यक्ष हैं और रक्षा, गृह और वित्त मंत्री इसके सदस्य हैं।
याचिका में दावा किया गया, ‘‘पीएम केयर्स फंड के दिशा-निर्देश के अनुसार अध्यक्ष औऱ तीन अन्य सदस्यों के अलावा अध्यक्ष को तीन और न्यासियों को नियुक्त या नामित करना है। हालांकि, 28 मार्च 2020 को इस न्यास के गठन के बाद से इस संबंध में कोई नियुक्त नहीं हुई है।’’
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