नयी दिल्ली, 18 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें बांधों से अचानक पानी छोड़े जाने के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि अचानक पानी छोड़े जाने से कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के पास जाने के लिए कहा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ के सामने यह याचिका सुनवाई के लिए आई थी।
पीठ ने पेशे से अधिवक्ता याचिकाकर्ता रवि शर्मा से कहा, “जब वैधानिक प्राधिकरण है, तो आप वहां क्यों नहीं जाते? अगर बांध उफान पर होंगे, तो आप जानते हैं कि क्या परिणाम होंगे? ये सभी विज्ञान से संबंधित मुद्दे हैं और विषय विशेषज्ञ ही इसपर जवाब दे सकते हैं। आप केवल समाचार पत्रों की खबरों पर निर्भर नहीं रह सकते।”
पीठ ने कहा, “आप जाकर संबंधित प्राधिकारियों को व्यापक प्रतिवेदन दें। जब आप ‘होमवर्क’ करेंगे तब ही हम नोटिस जारी करेंगे।”
अदालत ने कहा कि उसका मानना है कि जनहित याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा, “यदि याचिकाकर्ता के पास बांधों के रखरखाव में अधिकारियों की लापरवाही के संबंध में कोई विश्वसनीय जानकारी है, तो वह एक व्यापक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकता है।”
शीर्ष अदालत में दायर याचिका में शर्मा ने दलील दी थी कि बांधों से अचानक पानी छोड़े जाने के चलते कई इलाकों में बाढ़ आ जाती है।
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