देश की खबरें | पीसीपीएनडीटी नियमों के निलंबन की केन्द्र की अधिसूचना पर न्यायालय का रोक से इंकार
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नयी दिल्ली, 15 जून उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) नियम, 1996 के कुछ नियमों को 30 जून , 2020 तक निलंबित करने संबंधी केन्द्र सरकार की चार अप्रैल की अधिसूचना पर सोमवार को रोक लगाने से इंकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कोविड-19 की वजह से इस समय राष्ट्रीय संकट है और अभी इस महामारी पर काबू पाने के लिये डॉक्टरों की सेवाओं को बचाकर रखने की आवश्यकता है।

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न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतनागौडार और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये केन्द्र को नोटिस जारी किया। साथ ही पीठ ने कहा कि यदि अधिसूचना का 30 जून के आगे नवीनीकरण किया जाता है तो याचिकाकर्ता इस मुद्दे को फिर उठा सकता है।

पीठ ने कहा कि इस समय उसके लिये अधिसूचना में हस्तक्षेप करना संभव नहीं है और इसके साथ ही उसने मामले को जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया।

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यह याचिका साबू मैथ्यू जाज ने दायर की है। इसमें गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन का प्रतिषेध) नियम, 1996 के नियम 8, 9(8), और 18ए(6) को 30 जून तक निलंबित करने संबंधी चार अप्रैल की अधिसूचना को चुनौती देते हुये कहा गया है कि ऐसा करना गैरकानूनी और मनमाना है।

याचिका में कहा गया है कि मौजूदा मामले में मेडिकल प्रैक्टिस को विनियमित करने संबंधी कानूनों के तहत रिकार्ड रखना अनिवार्य होने के बावजूद पीसीपीएनडीटी नियमों के कतिपय प्रावधानों का लॉकडाउन की आड़ में मनमाने तरीके से निलंबित कर दिया गया है।

याचिका में पीसीपीएनडीटी नियमों के कतिपय नियम 30 जून तक निलंबित करने संबंधी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की चार अप्रैल की अधिसूचना निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार न्यायालय द्वारा पीसीपीएनडीटी कानून पर सही तरीके से अमल कराने से मिले लाभ सरकार की इस कार्रवाई से निष्फल हो जायेंगे। याचिका में कहा गया है कि इस कानून की योजना के अंतर्गत नियमों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि पीसीपीएनडीटी कानून, 1994 के अंतर्गत बने नियमों में से कुछ को निलंबित करने की सरकार की कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है।

अनूप

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