न्यायालय का टीएमसी सांसद की याचिका पर विचार से इंकार
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई की और कहा कि इसमें कोई दम नहीं है। पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद महुआ को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सांसद होने के नाते इस विषय पर सदन में चर्चा कर सकती हैं कि राज्य को सीएसआर के तहत लाभ मिलना चाहिए या नहीं क्योंकि उन्होंने याचिका में संबंधित कानून को चुनौती नहीं दी है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई की और कहा कि इसमें कोई दम नहीं है। पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद महुआ को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
महुआ मोइत्रा ने इस याचिका में कार्पोरेट मंत्रालय के 10 अप्रैल के सर्कुलर को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि कोविड-19 के लिये मुख्यमंत्री के राहत कोष और राज्य के राहत कोष में योगदान का कोपोरेट के सीएसआर खर्च के रूप में दावा नहीं किया जा सकता।
महुआ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम ने कहा कि कंपनी कानून के तहत कंपनियों द्वारा दिया गया योगदान सीएसआर माना जायेगा यदि इसे केन्द्र सरकार को दिया गया है। उन्होने कहा कि कंपनी कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है लेकिन कार्पोरेट मंत्रालय ने एक सर्कुलर में इस बारे में स्पष्टीकरण दिया है।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने संबंधित कानून को चुनौती नहीं दी है और वैसे भी इस सर्कुलर से प्रभावित किसी कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया है और याचिकाकर्ता खुद एक सांसद हैं। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सिर्फ स्पष्टीकरण आदेश को चुनौती दी है और हमारे सामने कोई कार्पोरेट नहीं है।
पीठ ने कहा कि वह याचिका खारिज कर देगी अन्यथा इसे वापस लिया जा सकता है। इस पर सुन्दरम ने इसे वापस ले लिया।
अनूप
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(The above story first appeared on LatestLY on May 05, 2020 04:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

