देश की खबरें | न्यायालय पशुओं पर कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया जिसमें कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक एआरटी के इस्तेमाल को ‘‘क्रूर’’ और ‘‘अवैध’’ घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 18 सितंबर उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया जिसमें कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक एआरटी के इस्तेमाल को ‘‘क्रूर’’ और ‘‘अवैध’’ घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और वन्य जीव कल्याण बोर्ड और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण समेत अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा है।

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पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्नk और न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन भी थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मवेशियों या जानवरों पर एआरटी तकनीक का इस्तेमाल पशु क्रूरता रोकथाम कानून 1960, जैविक विविधता कानून 2002, पर्यावरण (संरक्षण) कानून 1986 के प्रावधानों और संविधान का उल्लंघन है जिसके तहत जानवरों के साथ पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण की बात कही गयी है ।

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मदुरै के एस वेंकटेश ने याचिका में कहा है कि गर्भाधान एक स्वाभाविक और जैविक क्रिया है और हर जीवित प्राणि की जरूरत है। पशुओं समेत किसी भी जीवित प्राणि के इस अधिकार के साथ छेड़छाड़ करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। यह प्रकृति और प्रकृति के सिद्धांतों के खिलाफ है।

याचिका में कहा गया है कि स्वाभाविक गर्भाधान के बजाए कृत्रिम गर्भाधान का सहारा लेना क्रूरता है।

अनुरोध किया गया है कि याचिका का निपटारा होने तक पशुओं या मवेशियों पर एआरटी तकनीक के इस्तेमाल को रोकने के निर्देश दिए जाएं।

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