बेंगलुरु, सात सितंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में भारी बारिश के दौरान खुदाई का काम करने वाले एक ऑपरेटर के बह जाने और बाद में कोई पता नहीं लग पाने के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं करने के लिए बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को फटकार लगाई है।
अदालत ने नगर पालिका को 30 दिनों के भीतर पीड़ित के परिजनों को दस्तावेज सौंपने का आदेश दिया है। पीड़ित का शव कभी बरामद नहीं पाया जा सका, लेकिन बीबीएमपी ने उसकी पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान कर दिया है।
बीबीएमपी ने यह कहते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने से मना कर दिया कि प्रक्रिया के तहत चिकित्सक द्वारा मृत्यु का कारण प्रमाणित किए बिना इसकी अनुमति नहीं है।
प्रक्रिया पर अड़े रहने के बीबीएमपी के कृत्य को अतार्किक बताते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि जब शव उपलब्ध नहीं है, तो प्रतिवादी द्वारा फॉर्म 4ए के संदर्भ में प्रमाणपत्र पर जोर देने का सवाल पूरी तरह से अतार्किक होगा।
अदालत ने कहा कि यह जानते हुए भी कि फॉर्म 4ए से जुड़े प्रमाणपत्र की मांग को कभी भी पूरा नहीं किया जा सकता, प्रमाणपत्र पर जोर देने से याचिकाकर्ता के साथ गंभीर अन्याय हुआ है।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ सरस्वती एसपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनके 27 वर्षीय पति शांताकुमार एस. 20 मई, 2017 को एक नाले में काम करते समय भारी बारिश में बह गए थे। महालक्ष्मीपुरम पुलिस ने कहा था कि शांताकुमार एस. का शव नहीं मिला ।
बीबीएमपी मृत्यु प्रमाणपत्र फॉर्म चार या फॉर्म चार के प्रारूप में जारी करता है। फॉर्म चार अस्पताल में हुई संस्थागत मौत की स्थिति में जारी किया जाता है, लेकिन अस्पताल से बाहर हुई मौत पर फॉर्म चार-ए के तहत एक चिकित्सक को मौत का कारण समेत अन्य वहज को प्रमाणित करना पड़ता है।
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