नयी दिल्ली, पांच जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले से उत्पन्न एक याचिका पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) सहित केंद्र और अन्य से बुधवार को जवाब मांगा।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में, दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए नियमों का निर्धारण करने में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सर्वोच्चता कायम रखी थी।
उच्च न्यायालय की एक खंड पीठ द्वारा 20 जनवरी 2023 को सुनाये गये फैसले में यूजीसी का व्यापक रूप से समर्थन किया गया था। लेकिन यूजीसी उस आदेश के हिस्से से असंतुष्ट है, जिसमें कहा गया है सांविधिक संस्था के 2012 के निर्देश पूर्वप्रभावी नहीं होंगे।
इस विषय की जड़ें यूजीसी के 21 अगस्त 2012 के आदेश में है, जिसमें इसने कहा था कि दूरस्थ शिक्षा के तहत पाठ्यक्रम से जुड़ा एक विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार उस राज्य तक सीमित होगा, जहां वह स्थित है।
शुरूआत में एक विश्वविद्यालय ने यूजीसी के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की थी और कई अन्य ने इसका अनुकरण किया था।
उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ यूजीसी की याचिका सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ के समक्ष रखी गई।
पीठ ने कहा कि वह चाहती है कि यूजीसी एक हलफनामा दाखिल कर उस आदेश के बारे में बताये जिस पर उसने सवाल उठाये हैं। शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। हम इग्नू/प्रतिवादी संख्या 5 का विचार जानना चाहेंगे।’’
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