नयी दिल्ली, 17 मई उच्चतम न्यायालय ने जयपुर की जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी के कोरोना वायरस संक्रमित पाए जाने के बाद उपचार के लिए उसे दो माह की जमानत दी है।
न्यायालय ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में सुनवाई का सामना कर रहे आरोपी और अधिकारियों को उन सभी नियमों का पालन करना होगा जो चिकित्सकों ने कोविड-19 मरीजों के लिए तय किए हैं।
न्यायाधीश एम एम शांतानागौदर एवं न्यायाधीश आर एस रेड्डी की पीठ को आरोपी के वकील ने सूचित किया कि उनका मुवक्किल कोरोना वायरस संक्रमित पाया गया है और उसका उपचार चल रहा है।
पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामले की सुनवाई के बाद 15 मई के अपने आदेश में कहा ,‘‘हम याचिकाकर्ता को केवल उपर्युक्त आधार पर दो माह के लिए जमानत पर रिहा करने की इच्छा रखते हैं ताकि याचिकाकर्ता ठीक ढंग से अपना उपचार करा सके। हम स्पष्ट करते हैं कि हमने गुणदोष के आधार पर मामले पर विचार नहीं किया है।’’
पीठ ने कहा,‘‘दो माह बाद उसे जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।’’
पीठ ने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद आरोपी निचली अदालत में जमानत के लिए नई याचिका दाखिल कर सकता है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी और डी के देवेश ने राजस्थान की ओर से दलीले दीं।
पुलिस के अनुसार सितंबर 2018 के एक मामले में आरोपी पर मुकदमा चल रहा है । उन्होंने बताया कि एक सुसाइड नोट के आधार पर 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के बाद सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए थे।
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