नयी दिल्ली, 22 दिसंबर दिल्ली की एक अदालत ने संसद सुरक्षा चूक मामले में कथित ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ ललित झा की हिरासत शुक्रवार को पांच जनवरी तक के लिए बढ़ा दी।
विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर ने दिल्ली पुलिस की अर्जी पर आरोपी झा की हिरासत की अवधि बढ़ाई।
पुलिस ने अदालत से कहा कि जांच ‘‘महत्वपूर्ण चरण’’ में है और आरोपी को जांच के लिए विभिन्न स्थानों पर ले जाए जाने की आवश्यकता है।
लोक अभियोजक ने अदालत से कहा कि पूरे षड्यंत्र का पता लगाने और मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी से पूछताछ करने की आवश्यकता है।
लोक अभियोजक ने कहा, ‘‘हमें षड्यंत्र में शामिल असल लोगों का पता लगाने की आवश्यकता है... इस मामले की जांच करते हुए इसे समग्रता से देखे जाने की जरूरत है। हमें अपराध का असल मकसद पता करना होगा।’’
पुलिस ने अदालत से पहले कहा था कि झा इस पूरी घटना का मुख्य साजिशकर्ता है।
दिल्ली की एक अदालत ने संसद की सुरक्षा में सेंध मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल धनराज शिंदे और नीलम देवी की पुलिस हिरासत की अवधि बृहस्पतिवार को पांच जनवरी तक बढ़ा दी थी।
संसद पर 2001 में हुए आतंकवादी हमले की बरसी के दिन गत 13 दिसंबर को सुरक्षा में चूक की बड़ी घटना उस वक्त हुई थी जब लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से सागर शर्मा और मनोरंजन डी सदन के भीतर कूद गए थे और उन्होंने नारेबाजी करते हुए ‘केन’ के जरिये पीले रंग का धुआं फैला दिया था। घटना के तत्काल बाद दोनों को पकड़ लिया गया था।
ठीक इसी वक्त पीले रंग का धुआं छोड़ने वाली 'केन' लेकर संसद भवन के बाहर प्रदर्शन करने वाले दो अन्य लोगों अमोल शिंदे और नीलम देवी को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन लोगों ने ‘‘तानाशाही नहीं चलेगी’’ के नारे लगाये थे।
इस बीच एक संबंधित घटनाक्रम में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निचली अदालत के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें पुलिस को निर्देश दिया गया था कि वह संसद की सुरक्षा में चूक के मामले की आरोपी नीलम देवी को प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराए।
पुलिस के वकील ने तर्क दिया कि संवेदनशील मामलों में आरोपी को आयुक्त से संपर्क करना होता है जो प्राथमिकी की प्रति मुहैया कराने के आवेदन पर निर्णय लेने के लिए एक समिति का गठन करता है और यदि इसे अस्वीकार कर दिया जाता है तो आरोपी राहत के लिए अदालत का रुख कर सकता है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि निचली अदालत ने आरोपी को प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध कराने का पुलिस को निर्देश देकर गलती की है।
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