देश की खबरें | न्यायालय ने की तमिलनाडु के न्यायिक अधिकारियों की याचिका खारिज
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार सितंबर उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के आठ न्यायिक अधिकारियों की वह याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिये अपने नामों पर विचार करने का अनुरोध किया था।

इन न्यायिक अधिकारियों की यह शिकायत थी कि जिला न्यायाधीशों के काडर में वरिष्ठतम होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया है और उनके कनिष्ठ सहयोगियों के नामों की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिये सिफारिश की गयी है।

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याचिकाकर्तार्ओं ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि मद्रास उच्च न्यायालय की कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिये की गयी सिफारिशों की सूची लौटायी जाये।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की तीन सदस्यीय पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, हमारा मानना है कि याचिकाकर्ताओं का दावा पूरी तरह असमर्थनीय है और इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

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पीठ ने इस तथ्य का जिक्र किया कि याचिकाकर्ताओं का चयन और नियुक्ति 18 फरवरी, 2011 को सीर्धी भर्ती के माध्यम से जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) के पद पर हुयी थी और इसलिए अमुक तारीख तक न्यायिक सेवा में दस साल पूरे नहीं किये थे।

इन न्यायिक अधिकारियों की दलील थी कि उच्च न्यायालय में न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिये वकील के रूप में उनके अनुभव को न्यायिक अधिकारियों की सेवा में शामिल किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि जब उच्च न्यायालय में पदोन्नति के माध्यम से एक तिहाई रिक्त स्थानों पर राज्य न्यायिक अधिकारियों की भर्ती होनी थी तो उस वक्त उच्च न्यायालय की कॉलेजियम ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 217 (2) में प्रदत्त प्रावाधान के अनुरूप न्यायिक सेवा में 10 साल पूरे नहीं किये थे।

अनूप

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