देश की खबरें | न्यायालय ने दिल्ली दंगा मामले में देवांगना कलिता की जमानत के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुये दंगों से संबंधित मामले में ‘पिंजरा तोड़’ मुहिम की कार्यकर्ता देवांगना कलिता को जमानत प्रदान करने के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील बुधवार को खारिज कर दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुये दंगों से संबंधित मामले में ‘पिंजरा तोड़’ मुहिम की कार्यकर्ता देवांगना कलिता को जमानत प्रदान करने के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील बुधवार को खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने दिल्ली सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि प्रभावशाली व्यक्ति होना जमानत खारिज करने का आधार नहीं हो सकता ।

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दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने कहा कि कलिता बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले में केवल पुलिस गवाह हैं।

उन्होंने कहा कि मामले में कुछ और गवाह हैं जिन्हें सुरक्षा प्रदान की गयी है।

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पीठ ने राजू से सवाल किया कि ‘प्रभावशाली व्यक्ति’ होने के आधार पर क्या जमानत से इनकार किया जा सकता है? पीठ ने एएसजी से पूछा कि वह गवाहों को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं ।

पीठ ने कहा कि वह कलिता को जमानत प्रदान करने के उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

उच्च न्यायालय ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के मामले में एक सितंबर को कलिता को जमानत प्रदान करते हुए कहा था कि पुलिस ऐसे रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रही कि उन्होंने खास समुदाय की महिलाओं को भड़काया या नफरत फैलाने वाले भाषण दिए। अदालत ने कहा था कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से किए जाने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जो कि उनका मौलिक अधिकार है।

अदालत ने कहा था कि प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की मौजूदगी में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध लंबे समय से चल रहा था। इसके अलावा पुलिस विभाग के कैमरे भी वहां लगे थे लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कलिता की वजह से कथित अपराध हुआ।

उच्च न्यायालय ने कलिता को 20,000 रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत देने पर रिहा करने का आदेश दिया था। अदालत ने उसे निर्देश दिया था कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेगी और अदालत की अनुमति के बगैर देश से बाहर नहीं जायेगी।

पुलिस की अपराध शाखा ने कलिता और इस समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को मई महीने में दंगा करने, गैरकानूनी जमावड़ा करने और हत्या के प्रयास के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

इनके खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित अपराध के एक अलग प्रकरण में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और इसका विरोध कर रहे लोगों के बीच हिंसक झड़प होने के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को सांप्रदायिक दंगे भड़क गये थे, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मृत्यु हो गयी थी और करीब 200 अन्य जख्मी हुये थे।

पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दरियागंज में दंगा और हिंसा को लेकर कलिता के खिलाफ कुल चार मामले दर्ज किये गये थे।

छात्रावासों और पीजी आवासीय सुविधाओं को महिला छात्रों के लिये कम प्रतिबंधित बनाने के उद्देश्य से 2015 में पिंजड़ा तोड़ समूह का गठन किया गया था।

अनूप

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