नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को फेसबुक और गूगल को भाजपा नेता शशिकला पुष्पा से संबंधित कथित अपमानजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया है। भाजपा नेता ने दावा किया कि एक व्यक्ति के साथ उसकी तस्वीरों और वीडियो को कथित तौर पर छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया पर डाला गया जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने मुकदमे के खर्च के रूप में शशिकला पुष्पा को दो-दो लाख रुपये देने का भुगतान करने के लिये फेसबुक इंक के साथ ही गूगल एलएलसी और यूट्यूब एलएलसी को एकल न्यायाधीश के दो जून को फैसले पर भी रोक लगा दी।
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वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई कर रही खंडपीठ ने अन्ना द्रमुक की पूर्व नेता शशिकला की अपील पर नोटिस जारी किया और सोशल मीडिया कंपनियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस अपील में दो जून के फैसले को चुनौती दी गई।
अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तारीख तय की।
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उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, ‘‘इस बीच प्रतिवादियों (फेसबुक, गूगल और यूट्यूब) को फौरन आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया जाता है।’’
फेसबुक, गूगल और यूट्यूब ने पीठ के समक्ष दलील दी कि वे केवल मध्यस्थ हैं और अपने प्लेटफॉर्म्स पर कोई सामग्री अपलोड नहीं करते।
फेसबुक और गूगल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील क्रमश: मुकुल रोहतगी और अरुण कठपालिया ने कहा कि वे उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे और फौरन सामग्री हटाएंगे।
शशिकला की वकील रिचा कपूर ने उन यूआरएल की सूची भी मुहैया करायी जिन्हें हटाया जाना है।
एकल पीठ ने अपने दो जून के फैसले में कहा था कि लोगों को यह जानने का अधिकार है उनकी निर्वाचित प्रतिनिधि बंद दरवाजों के पीछे किससे मुलाकात कर रही हैं और किससे नजदीकियां बढ़ा रही है।
शशिकला 2016 में वाद दायर किये जाने के वक्त अन्नाद्रमुक से निष्कासित राज्य सभा की सदस्य थीं और वह इस साल अप्रैल में भाजपा में शामिल हो गयी थीं।
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