देश की खबरें | अदालत ने पशु कल्याण बोर्ड को देश भर में सर्कस में जानवरों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पशु कल्याण बोर्ड को सर्कस में रखे गये जानवरों की संख्या का पता लगाने के लिये एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण फौरन करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें नजदीक के प्राणि उद्यानों में भेजे जाने पर भी विचार करने को कहा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पशु कल्याण बोर्ड को सर्कस में रखे गये जानवरों की संख्या का पता लगाने के लिये एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण फौरन करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें नजदीक के प्राणि उद्यानों में भेजे जाने पर भी विचार करने को कहा।

अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सर्कस के दिवालिया हो जाने के कारण वहां जानवर जोखिम में हैं।

यह भी पढ़े | Bihar Floods: बाढ़ से बिहार का बुरा हाल, गर्भवती महिला को लोगों ने ट्यूब की नाव पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाया- देखें वीडियो.

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबी) को सर्कस अधिकारियों से इस बारे में विशेष रूप से पूछताछ करनी चाहिए कि क्या वे जानवरों की देखभाल कर पाने की स्थिति में हैं या जानवरों को पुनर्वास के लिये नजदीकी प्राणि उद्यान में भेजे जाने की जरूरत है।

अदालत ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई करते हुए बोर्ड को इस बारे में किये गये सर्वेक्षण की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

यह भी पढ़े | बिहार के अस्पताल वार्ड में लावारिस शव को पड़े होने पर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना: 21 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

अदालत ने विषय पर सुनवाई की अगली तारीख 14 अगस्त के लिये निर्धारित की है।

अदालत फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन द्वारा दायर एक याचिका पर पर सुनवाई कर रही है। यह फेडरेशन जंतु अधिकारों पर एक दशक से अधिक समय से काम कर रहे 100 से अधिक संगठनों का एक समूह है।

याचिका में जानवरों से निर्ममता की रोकथाम अधिनियम की धारा 21 और 27 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। ये धाराएं सर्कस से जुड़े कार्यों के लिये जानवरों को प्रदर्शित किये जाने और उनके प्रशिक्षण से संबद्ध हैं।

अदालत ने मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के जरिये केंद्र को नोटिस जारी किया है तथा उन्हें दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

फेडरेशन के कार्यकारी निदेशक वरद मेहरोत्रा ने एक बयान में कहा, ‘‘सर्कस में करतब दिखाने के लिये जानवरों का उपयोग उनके लिये कष्टदायी होता है...वहीं, कोरोना वायरस महामारी के दौरान स्थिति बदतर हो गई हैं। इसलिए, सर्कस में जानवरों का उपयोग बंद होना चाहिए और यथाशीघ्र उन्हें वहां से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाना चाहिए। ’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\