नयी दिल्ली, 27 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने एसबीआई कैप से आम्रपाली समूह की छह रुकी हुई परियोजनाओं का वित्त पोषण शुरू करने को कहा है।
उच्चतम न्यायालय को वित्तीय संस्थानों द्वारा इन्हीं छह परियोजनाओं का वित्तपोषण व्यवहार्य पाये जाने की जानकारी दिये जाने के बाद शीर्ष अदालत ने यह निर्देश दिया।
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न्यायालय ने केंद्र सरकार से इसे एक विशेष मामला मानते हुये रियल एस्टेट क्षेत्र के लिये सृजित कोष से अन्य अटकी परियोजनाओं के निर्माण के लिये शेष राशि मुहैया कराने को कहा है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ को एसबीआई कैप की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने बताया कि उसने (एसबीआई कैप ने) आम्रपाली समूह की छह परियोजनाओं को वित्तपोषित करने का निर्णय लिया है।
पीठ ने कहा, “साल्वे ने कहा कि एसबीआई कैप द्वारा पहचानी गयी छह परियोजनाओं का वित्त पोषण शुरू करने का आदेश पारित किया जा सकता है। हालांकि, रिसीवर ने कुछ सुझाव दिये हैं, जिस पर साल्वे ने कहा कि यदि किसी परियोजना के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा कोई निर्देश जारी किया जाता है, तो वे एक विशेष मामले के रूप में इसका पालन करेंगे।’’
शीर्ष अदालत ने केंद्र की तरफ से प्रस्तुत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को इसे विशेष मामले की तरह से लेने को लेकर उपयुक्त कार्रवाई करने के लिये वित्त मंत्रालय के साथ संपर्क करने को कहा।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिये 31 अगस्त का समय रखते हुए कहा, ‘‘निवेश पर लाभ के संदर्भ में वित्तपोषण पर ब्याज की मौजूदा दर पर भी विचार किया जा सकता है।’’
एसबीआई कैप वेंचर्स रियल एस्टेट क्षेत्र के लिये केंद्र द्वारा सृजित विशेष कोष का प्रबंधन करती है। उसने आम्रपाली के घर खरीदारों को राहत प्रदान करते हुए उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह बंद हो चुकी कंपनी की अटकी परियोजनाओं का वित्त पोषण करने के लिये तैयार है।
कंपनी ने कहा कि वह इसके लिये एक विशेष कंपनी (विशेष उद्देश्य साधन / स्पेशल पर्पस व्हीकल) बनायेगी, जिसमें न्यायालय के रिसीवर निदेशक मंडल में शामिल होंगे। सात अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के कार्य की निगरानी करने के लिये एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की भी नियुक्ति की जायेगी।
उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी से त्रस्त रियल एस्टेट कंपनियों को बहुप्रतीक्षित राहत प्रदान करते हुए भूखंड के बकाये पर प्राधिकरणों द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज की दर पर पर अधिकतम आठ प्रतिशत की सीमा भी लगा दी। प्राधिकरण सामान्य तौर पर इस तरह के बकाये पर 15 से 23 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूलते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को लेकर परियोजनाएं अटक गयी हैं। ऐसे में घर खरीदारों की बदहाली को देखते हुए क्षेत्र को राहत की जरूरत है।
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