देश की खबरें | अदालत ने कोविड-19 के बीच मंदिरों को फिर से खोलने पर महाराष्ट्र सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बीच पूजा स्थलों को फिर से खोलने के संबंध में वह अपना रुख स्पष्ट करे।
मुंबई, 18 अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बीच पूजा स्थलों को फिर से खोलने के संबंध में वह अपना रुख स्पष्ट करे।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ शहर के एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राज्य में मंदिरों को फिर से खोलने और सीमित संख्या में भक्तों को प्रवेश करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी को निर्देश दिया कि वह इस बारे में राज्य के रुख को स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करें।
महाधिवक्ता ने हालांकि अदालत को बताया कि 12 अगस्त को राज्य ने अदालत की एक अन्य पीठ के समक्ष जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए उसका अभी किसी भी पूजा स्थल को खोलने का इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि उक्त जवाब उस याचिका की सुनवाई में दिया गया था जिसमें जैन मंदिरों को भक्तों के लिए खोलने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार का हर पूजा स्थल के बारे में वही रुख है, भले ही वह किसी भी धर्म से संबंधित हो।
याचिका दायर करने वाले एनजीओ के वकील दीपेश सिरोया ने तर्क दिया कि कोरोना वायरस के बाद भी आंध्र प्रदेश में तिरुपति मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया है।
लेकिन पीठ ने राज्य सरकार को अलग से हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
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