मुंबई, 21 फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से पूछा कि अगर मूल अपराध के मामले पर कार्रवाई बंद कर दी गई है तो इस पर आधारित ‘प्रवर्तन सूचना रिपोर्ट’ (ईसीआईआर) को रद्द क्यों नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ईडी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एक कथित धन शोधन मामले को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
आम तौर पर पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी द्वारा दर्ज आपराधिक मामले के आधार पर ईसीआईआर दर्ज की जाती है।
गोयल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम और आबाद पोंडा ने दलील दी कि ईसीआईआर 2018 में मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी।
हालांकि, मार्च 2020 में पुलिस ने यह कहते हुए एक ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की कि उन्हें शिकायत में कोई तथ्य नहीं मिला और विवाद दीवानी प्रकृति का लग रहा है। मजिस्ट्रेट अदालत ने रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।
बचाव पक्ष के वकीलों ने इस आधार पर ईसीआईआर को रद्द करने का अनुरोध किया। वहीं, ईडी की ओर से पेश वकील हितेन वेनेगांवकर और श्रीराम शिरसात ने तर्क दिया कि ईसीआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक ‘‘आंतरिक, निजी कागजात है।’’
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने ईडी के वकीलों को निर्देश लेने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई बुधवार के लिए मुकर्रर की।
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