देश की खबरें | अदालत ने आप सरकार से दो डॉक्टरों को अध्ययन अवकाश नहीं देने के फैसले पर पुनर्विचार को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी की सरकार से दो चिकित्सकों को अध्ययन अवकाश नहीं देने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी की सरकार से दो चिकित्सकों को अध्ययन अवकाश नहीं देने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
इन डॉक्टरों को डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अवकाश इस आधार पर नहीं दिया गया कि आने वाले महीनों में कोरोना वायरस महामारी के मामले और बढ़ने की आशंका है।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि जब डॉक्टरों को जून में कोविड-19 के मामलों मे तेजी से वृद्धि के दौरान डीएनबी सीटों के लिए काउंसलिंग में शामिल होने के वास्ते बिना शर्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दे दिया गया था तो बड़ी अजीब बात है कि उन्हें अब इस आधार पर अवकाश नहीं दिया जा रहा कि नवंबर और दिसंबर में संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों डॉक्टरों ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) पीजी-2020 में उच्च रैंक हासिल की है और उनमें से एक को अपोलो अस्पताल बेंगलुरू में डीएनबी रेडियोडायग्नोसिस तो दूसरे को सेंट स्टीफन्स अस्पताल, दिल्ली में डीएनबी जनरल मेडिसिन (ब्रोड स्पेशियलिटी) आवंटित हुआ है।
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अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ताओं से पाठ्यक्रम के लिए प्रति प्रशिक्षणार्थी 1,25,000 रुपये का शुल्क अदा करने को कहा गया था, जिसे उन्होंने 27 अगस्त को जमा करा दिया था।’’
सरकार ने अदालत में दलील दी कि अध्ययन अवकाश देना अधिकार का विषय नहीं है और सेवा की अनिवार्यता संबंधी विषय है। दूसरी बात यह है कि महामारी को देखते हुए सक्षम प्राधिकार ने सोच-समझकर यह विचार किया है कि इस समय डॉक्टरों को अवकाश देना समझदारी वाला कदम नहीं होगा।
अदालत ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि दोनों डॉक्टर एनओसी प्राप्त करने के बाद ही काउंसलिंग में शामिल हुए थे और इस लिहाज से सक्षम प्राधिकार को फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया जाता है।
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