नयी दिल्ली, सात दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी की एक निचली अदालत ने उत्तरपूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगों से जुड़े एक मामले में नौ आरोपियों को ''संदेह का लाभ'' देते हुए शनिवार को बरी कर दिया।
इन नौ लोगों पर 25 फरवरी, 2020 को यहां चमन पार्क इलाके में एक दुकान में डकैती और आगजनी करने वाली एक उपद्रवी भीड़ के सदस्य होने का आरोप लगाया गया था।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष का इकलौता गवाह एक हेड कांस्टेबल था और इसने कहा कि एकमात्र गवाही यह मानने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती कि आरोपी भीड़ का हिस्सा थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा, "मुझे लगता है कि इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए हैं। इसलिए आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।"
गोकलपुरी थाना पुलिस ने मो. शाहनवाज, मो. शोएब, शाहरुख, राशिद, आजाद, अशरफ अली, परवेज, मो. फैसल और राशिद पर दंगा सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
अदालत ने कहा कि उपद्रवी भीड़ द्वारा दंगों और आगजनी का गैरकानूनी काम "अच्छी तरह से स्थापित" है, लेकिन, यह भी तथ्य मौजूद है कि आरोपी व्यक्तियों की पहचान साबित करने के लिए हेड कांस्टेबल विपिन एकमात्र गवाह था। अदालत ने कहा, ‘‘लेकिन आरोपियों का विवरण जानने के बावजूद, उनकी संलिप्तता की जानकारी औपचारिक रूप से सात अप्रैल, 2020 तक दर्ज नहीं की गयी थी।’’
अदालत ने कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को देने में देरी को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था।
न्यायाधीश ने कहा, "ऐसी स्थिति में, आरोपी व्यक्तियों को संदेह का लाभ दिया जाता है।’’
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