गांधीनगर, 16 अगस्त विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि सभी आय वर्ग के देशों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) में निवेश करना चाहिए, जिससे 80 प्रतिशत से अधिक सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं और शुरुआती चरण में महामारी के प्रकोप का पता लगाने में भी मदद मिल सकती है।
सार्स-सीओवी-2 वायरस के ईजी.5 स्वरूप को हाल ही में डब्ल्यूएचओ द्वारा “निगरानी में रखने योग्य” के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर घेब्रेयेसस ने कहा कि “सतर्कता जारी रखना” महत्वपूर्ण है।
घेब्रेयसस पारंपरिक चिकित्सा पर एक वैश्विक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां पहुंचने के बाद जिले के अदराज मोती गांव में एक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (एचडब्ल्यूसी) के दौरे के दौरान मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “भारत सरकार द्वारा ‘आयुष्मान भारत’ में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश सही है, और हम सभी देशों से वास्तव में इसी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कह रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं, उच्च आय वाले देशों सहित कई देश कोविड-19 से स्तब्ध थे।”
उन्होंने कहा कि समस्या इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश कम था।
घेब्रेयेसस ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने घोषणा के बाद से ही भारत की ‘आयुष्मान भारत’ पहल का समर्थन किया है क्योंकि उसका मानना है कि देशों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश करना चाहिए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह कुछ ऐसा है जो डब्ल्यूएचओ देशों को बताता रहा है “और भारत वास्तव में ऐसा कर रहा है”।
आयुष्मान भारत, केंद्र की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के दृष्टिकोण को प्राप्त करना है।
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