देश की खबरें | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई मुख्य प्राथमिकता : विदेश मंत्रालय

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नयी दिल्ली, 18 जून संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुने जाने के कुछ घंटे बाद भारत ने गुरूवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस शक्तिशाली ईकाई द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई बढाना और आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया का अराजनीतिकरण उसकी मुख्य प्राथमिकताओं में होगा ।

भारत को अभूतपूर्व चुनाव में दो साल के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुन लिया गया । कोरोना वायरस महामारी के कारण सामाजिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए 192 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मास्क पहनकर मतदान किया ।

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भारत के चयन की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने कहा कि भारत उन सभी देशों की आवाज बनकर काम करेगा जो परिषद के सदस्य नहीं हैं ।

उन्होंने कहा कि एक देश के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव में भारत का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है । सुरक्षा परिषद की पांच अस्थायी सीटों के लिये हुए चुनाव में भारत को 192 में से 184 मत मिले ।

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सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में भारत की प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा आतंकवाद निरोधक कार्रवाई में इजाफा भारत की मुख्य प्राथमिकता होगी ।

स्वरूप ने कहा ,‘‘ इससे पहले भी भारत 2011 . 12 के दौरान सुरक्षा परिषद का सदस्य था, तब हम संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक समिति के अध्यक्ष रहे और ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता’ की अवधारणा को लेकर आये ।’’

उन्होंने कहा कि आगामी कार्यकाल में भारत आतंकवाद , उसके समर्थकों और हमदर्दों और आतंकवादियों की ऐशगाहों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई बढाने के लिये काम करेगा जिसके लिये आतंकवादियों और आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जायेगा ।

उन्होंने कहा ,‘‘ प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया का अराजनीतिकरण भी जरूरी है क्योंकि आतंकवाद की घटनाओं को लेकर कोई सफाई नहीं दी जा सकती ।’’

स्वरूप ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझाौते को जल्दी अंतिम रूप दिये जाने पर भी काम करेगा जिसका प्रस्ताव 1996 में भारत ने रखा था ।

यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कोई द्विपक्षीय मसला उठाया और मौके के राजनीतिकरण की कोशिश की, उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों और वर्षों से पाकिस्तान इस तरह का बर्ताव करता आया है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ वे हमेशा बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय मसले उठाते आये हैं । यह तो अब उनकी नीति का हिस्सा ही हो गया है ।’’

स्वरूप ने कहा ,‘‘ जहां तक हमारा सवाल है तो हमारी विदेश नीति का व्यापक दायरा है और विस्तृत तथा वैश्विक फोकस है । हम सुरक्षा परिषद के विचाराधीन मसलों पर विदेश मंत्री (एस जयशंकर) द्वारा रेखांकित प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करेंगे ।’’

स्वरूप ने कहा कि सुरक्षा परिषद में भारत का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुधारवादी बहुपक्षवाद की अपील और विदेश नीति के 5-एस दृष्टिकोण से प्रेरित होगा जिसमें सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और वैश्विक समृद्धि के लिये परिस्थितियां बनाना शामिल है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ इसके जरिये हम एनओआरएमएस यानी ‘न्यू ओरिएंटेशन फॉर अ रिफार्म्ड मल्टीलेटरल सिस्टम (सुधारवादी बहुपक्षीय व्यवस्था के लिये नवीन उन्मुखीकरण) की तरफ बढेंगे ।’’

भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के तौर पर दो साल का कार्यकाल एक जनवरी 2021 से शुरू होगा ।

भारत के अलावा आयरलैंड, मैक्सिको और नॉर्वे भी चुने गए हैं । भारत आठवीं बार परिषद का अस्थायी सदस्य बना है ।

इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और हाल ही में 2011-2012 चुना जा चुका है ।

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