विदेश की खबरें | कोरोना वायरस: भारतवंशी शिक्षाविद् ने की ब्रिटेन से नस्ली जोखिम संबंधी परामर्श प्रकाशित करने की अपील

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारतीय मूल के एक शिक्षाविद ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने एक सरकारी जांच के उस दस्तावेज की समीक्षा की है, जिसमें ब्रिटेन में जातीय अल्पसंख्यकों को कोविड-19 संक्रमण के वृहद खतरे से बचाने संबंधी कुछ सिफारिशें की गई हैं और इसे जल्द प्रकाशित किया जाना चाहिए।

लंदन, 12 जून भारतीय मूल के एक शिक्षाविद ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने एक सरकारी जांच के उस दस्तावेज की समीक्षा की है, जिसमें ब्रिटेन में जातीय अल्पसंख्यकों को कोविड-19 संक्रमण के वृहद खतरे से बचाने संबंधी कुछ सिफारिशें की गई हैं और इसे जल्द प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रोफेसर राज भोपाल ने यह बात तब कही है जब ‘पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड’ (पीएचई) की पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट के अधूरा होने की बात सामने आने के बाद ब्रिटेन में विपक्षी लेबर पार्टी ने काले, एशियाई और नस्ली अल्पसंख्यकों (बीएएमई) के लोगों को बचाने में मददगार हो सकने वाले दस्तावेज को बाधित करने को ‘‘घोटाला’’ करार दिया है।

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एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा कॉलेज में अशर इंस्टीट्यूट के लोक स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे प्रोफेसर भोपाल ने कहा, ‘‘सिफारिशों के बिना कोई कदम नहीं उठाए जा सकते। इसे अगले सप्ताह प्रकाशित किए जाने की आवश्यकता है और जिन लोगों ने इनके अस्तित्व में होने की बात से ही इनकार कर दिया है, उन्हें लोगों से माफी मांगनी चाहिए।’’

उन्होंने बताया कि उन्होंने जिस दस्तावेज की समीक्षा की थी, उसमें हजारों व्यक्तियों एवं संगठनों के अनुभव शामिल हैं।

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उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक द्वारा पिछले सप्ताह ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में पेश की गई पीएचई की ‘कोविड-19 के जोखिम में असमानताएं एवं परिणाम’ रिपोर्ट के पूरक हिस्से के तौर पर यह दस्तावेज तैयार किया गया है।

पीएचई की रिपोर्ट इंगित करती है कि इंग्लैंड में भारतीय मूल के अधिक उम्र वाले लोगों में कोरोना वायरस के कारण मौत का अपेक्षाकृत अधिक खतरा है। श्वेत ब्रितानी लोगों की तुलना में भारतीय, पाकिस्तानी, अन्य एशियाई, कैरेबियाई एवं अन्य काले समुदायों और चीनी मूल के लोगों को कोरोना वायरस के कारण मौत का 10 से 50 प्रतिशत तक अधिक खतरा है।

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