देश की खबरें | झारखंड में कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट हिंदपीढ़ी निषिद्ध क्षेत्र से बाहर आया, लोगों ने राहत की सांस ली

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. झारखंड की राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके को 61 दिनों तक सील रखने के बाद सोमवार सुबह से खोल दिया गया, जिससे यहां के लोगों ने राहत की सांस ली है। राज्य में कोरोना वायरस का पहला मामला इसी इलाके में सामने आया था, जिसके बाद इस इलाके को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर इसे पूरी तरह सील कर दिया गया था।

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रांची, एक जून झारखंड की राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके को 61 दिनों तक सील रखने के बाद सोमवार सुबह से खोल दिया गया, जिससे यहां के लोगों ने राहत की सांस ली है। राज्य में कोरोना वायरस का पहला मामला इसी इलाके में सामने आया था, जिसके बाद इस इलाके को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर इसे पूरी तरह सील कर दिया गया था।

हिंदपीढ़ी इलाके में पिछले लगभग दो माह में कोरोना संक्रमितों के कुल 70 मामले सामने आये, लेकिन पिछले 28 दिनों से कोरोना वायरस के संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने रविवार की रात्रि पूरे क्षेत्र की समीक्षा कर इसे निषिद्ध क्षेत्र से बाहर लाने का फैसला किया। इसके तहत आज वहां के लोगों को राज्य के अन्य इलाकों की तरह सामान्य गतिविधियां करने की छूट दे दी गई।

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रांची के अनुमंडल पदाधिकारी लोकेश मिश्रा ने सोमवार को बताया कि झारखंड में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला 31 मार्च को हिंदपीढ़ी इलाके में तब सामने आया था जब वहां मलेशियाई महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गयी थी। बताया जाता है कि वह तबलीगी जमात के कार्यक्रम से लौटी थी।

उन्होंने कहा कि इसके उसके तत्काल बाद आइसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के दिशानिर्देशों के तहत तीन किलोमीटर के दायरे में पूरे हिंदपीढ़ी इलाके को सील कर दिया गया था। मिश्रा ने बताया कि रविवार रात को समीक्षा करने के बाद इस इलाके को निषिद्ध क्षेत्र से बाहर करने का फैसला किया गया।

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मिश्रा ने बताया कि हिंदपीढ़ी इलाके को पिछले 61 दिनों तक लगभग पूरी तरह से बंद रखा गया और इस दौरान वहां के सभी आठ हजार से अधिक परिवारों की जांच और स्क्रीनिंग की गयी तथा संक्रमित होने की आशंका में साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों के स्वैब नमूनों को प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया।

उन्होंने बताया कि इन साढ़े तीन हजार नमूनों की जांच में लगभग 70 को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया और इनका राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान :रिम्सः तथा सीसीएल के गांधी नगर अस्पताल में इलाज किया गया।

मिश्रा ने बताया कि इलाज के बाद इलाके के सिर्फ दो लोगों को छोड़कर अन्य सभी स्वस्थ होकर वापस अपने घर लौट चुके हैं।

उन्होंने बताया कि हिंदपीढ़ी इलाके की दो गलियों में कोरोना वायरस से संक्रमित एक-एक मरीज का अब भी रांची के अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिसके कारण इन दो गलियों को अब माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर बंद रखा गया है। शेष पूरे हिंदपीढ़ी इलाके को निषिद्ध क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है। अब वहां के लोगों को राज्य के अन्य इलाके के लोगों की तरह अपने आवश्यक कामकाज करने की छूट दे दी गयी है।

इस बीच हिंदपीढ़ी इलाके के निवासी नईम ने कहा कि दो महीने बाद हम लोगों को छूट मिली है, लेकिन अब भी हम लोगों को पूरी तरह नियमों का पालन करना होगा जिससे यह इलाका दोबारा कोरोना वायरस की चपेट में नहीं आए।

इलाके में मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स एवं अन्य दुकानें आज से खुल गयीं जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है।

जिला प्रशासन ने आइसीएमआर के निर्देशों के तहत हिंदपीढ़ी के आठ हजार से अधिक परिवारों की पिछले दो महीने में तीन बार सर्वे और स्क्रीनिंग की, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक बार फिर से यह इलाका राज्य में संक्रमण का बड़ा केंद्र नहीं बन सके।

अनुमंडल पदाधिकारी लोकेश मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में रांची में लगभग 12 माइक्रो कंटेनमेंट जोन हैं और उनको छोड़कर लगभग पूरा शहर सुरक्षित है, जिसे देखते हुए लोगों को केन्द्र के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अपने व्यावसायिक कार्य करने की छूट दी गयी है।

इस बीच केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के झारखंड के पुलिस महानिरीक्षक राजकुमार ने ‘पीटीआई- ’ को बताया कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की दो कंपनियां हिंदपीढ़ी में तैनात हैं और वहां कानून- व्यवस्था लागू करने में स्थानीय पुलिस की मदद कर रही हैं।

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