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Corona Pandemic: भारत की दूसरी कोरोना लहर ज्यादा संक्रामक, मगर कम घातक

दूसरा अंतर यह है कि सकारात्मक परीक्षण करने वाले कई और मामले स्पशरेन्मुख या हल्के रोगसूचक हैं, जिसके परिणामस्वरूप अस्पताल में भर्ती होने और मृत्युदर की अपेक्षाकृत कम दरें होती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि स्पशरेन्मुख मामलों का उच्च अनुपात पूरी तरह से बेहतर संपर्क ट्रेसिंग के कारण हैं.

Corona Pandemic: भारत की दूसरी कोरोना लहर ज्यादा संक्रामक, मगर कम घातक
कोरोना का कहर (Photo Credits: PTI)

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी की दूसरी लहर सितंबर 2020 में आई पहली लहर से अलग है, क्योंकि नए मामले बढ़ने की दर काफी अधिक है. लैंसेट कोविड-19 कमीशन इंडिया टास्क फोर्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि फरवरी से अप्रैल तक प्रतिदिन 10,000 से 80,000 नए मामलों की वृद्धि 40 दिनों से भी कम समय में हुई. पिछले सितंबर में इस सफर में 83 दिन लगे थे. गुरुग्राम में नहीं थम रहा कोरोना का कहर, पिछले 24 घंटे में COVID-19 के 2401 नए केस

दूसरा अंतर यह है कि सकारात्मक परीक्षण करने वाले कई और मामले स्पशरेन्मुख या हल्के रोगसूचक हैं, जिसके परिणामस्वरूप अस्पताल में भर्ती होने और मृत्युदर की अपेक्षाकृत कम दरें होती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि स्पशरेन्मुख मामलों का उच्च अनुपात पूरी तरह से बेहतर संपर्क ट्रेसिंग (अधिक परिवार के सदस्यों, उदाहरण के लिए, परीक्षण किया जा रहा है) के कारण हैं.

मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत के बाद से समग्र मामला मृत्यु अनुपात (सीएफआर) लगभग 1.3 प्रतिशत बताया गया है, जबकि 2021 की शुरुआत से वायरस का अनुबंध करने वाले रोगियों के बीच सीएफआर 0.87 प्रतिशत से काफी कम है.

अनंतिम रूप से, ऐसा लगता है कि सीएफआर दूसरी लहर में कम प्रतीत होता है.

फिर भी भारत देश भर में प्रतिदिन 664 मौतों की सूचना मिल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मृत्यु संख्या संक्रमण दरों में अंतराल है, और संक्रमण बढ़ने के रूप में वृद्धि होने की संभावना है.

पिछले एक साल में 215 जिले ऐसे हैं जो एक समय में केस इन्फेक्शन के मामले में टॉप 10 फीसदी में शामिल रहे हैं.

लेकिन नौ जिले (चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, नासिक, नई दिल्ली, उत्तर 24 परगना, पुणे, ठाणे और सोलापुर) साल भर में शीर्ष 10 फीसदी का हिस्सा रहे हैं. दूसरी लहर भी अब तक भौगोलिक रूप से अधिक जटिल रही है.

शीर्ष 50 फीसदी वाले जिलों की संख्या पिछले शिखर के समय 40 से अधिक से गिरकर वर्तमान में 20 से भी कम हो गई है, जो अधिक केंद्रित महामारी का संकेत है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वास्तव में अगस्त और सितंबर 2020 के दौरान पहली वृद्धि के दौरान शीर्ष 75 फीसदी मामलों के लिए जिलों की संख्या 60-100 थी, जबकि इस लहर के दौरान यह लगभग 20-40 जिले रहे हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 19, 2021 09:11 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).