कोरोना माता मंदिर को गिराने का मामला: न्यायालय ने याचिका खारिज की, प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया
उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक महिला द्वारा अपने पति के साथ मिलकर निर्मित ‘‘कोरोना माता मंदिर’’ को ध्वस्त किये जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका ‘‘प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ बताते हुए खारिज कर दी.
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रतापगढ़ जिले में एक महिला द्वारा अपने पति के साथ मिलकर निर्मित ‘‘कोरोना माता मंदिर’’ को ध्वस्त किये जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका ‘‘प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ बताते हुए खारिज कर दी.न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने याचिका खारिज करने के साथ ही याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. पीठ ने साथ ही कहा कि जिस जमीन पर मंदिर बनाया गया था, वह विवादित थी.
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता की दलील है कि यह उसकी निजी जमीन है और निर्माण स्थानीय नियमों के अनुसार किया गया है तो उसने उचित कानूनी उपाय का इस्तेमाल नहीं किया.पीठ ने कहा, ‘‘अब तक, याचिकाकर्ता ने इस देश के लोगों को संक्रमित करने वाली अन्य सभी संभावित बीमारियों के लिए मंदिरों का निर्माण नहीं किया है. भूमि ही विवादित थी, जैसा कि दर्ज किया गया है। इस संबंध में पुलिस में एक शिकायत की गई थी. ’’यह भी पढ़े: उच्चतम न्यायालय ने बंबई उच्च न्यायालय के आवासीय परियोजना संबंधी आदेश के खिलाफ याचिकाओं को खारिज किया
पीठ ने कहा, ‘‘हमारा विचार है कि यह स्पष्ट रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. रिट याचिका को 5,000 रुपये का जुर्माना लगाने के साथ खारिज किया जाता है. जुर्माने की राशि चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड वेलफेयर फंड में जमा करायी जाए. ’’याचिकाकर्ता दीपमाला श्रीवास्तव ने मौलिक अधिकार के उल्लंघन को लेकर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का उल्लेख करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था.
प्रतापगढ़ के जूही शुकुलपुर गांव में "कोरोना माता" मंदिर का निर्माण किया गया था. मंदिर का निर्माण 7 जून को किया गया था और इस मंदिर 11 जून की रात को गिरा दिया गया.ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसे पुलिस ने ध्वस्त कर दिया, जिसने आरोप से इनकार करते हुए कहा कि यह एक विवादित स्थल पर बनाया गया था और विवाद में शामिल पक्षों में से एक ने इसे तोड़ दिया.
ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर का निर्माण लोकेश कुमार श्रीवास्तव ने स्थानीय निवासियों के दान से किया था। उन्होंने "कोरोना माता" की मूर्ति स्थापित की. गांव के राधेश्याम वर्मा को इसका पुजारी नियुक्त किया गया, जिसके बाद लोग वहां पूजा-अर्चना करने लगे थे.नोएडा में रहने वाले लोकेश का स्वामित्व जमीन पर नागेश कुमार श्रीवास्तव और जय प्रकाश श्रीवास्तव के साथ है. मंदिर निर्माण के बाद वह गांव से नोएडा चला गया.नागेश ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा कि मंदिर का निर्माण जमीन हथियाने के लिए किया गया था.
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 09, 2021 01:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

