देश की खबरें | ‘द पीकॉक’ में दिवंगत कवि वाघ की जातीय भेदभाव आधारित कविता नहीं छापने पर विवाद

पणजी, 27 नवंबर भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका में गोवा के दिवंगत लेखक और पूर्व भाजपा विधायक विष्णु सूर्य वाघ की जातीय भेदभाव पर आधारित कविता प्रकाशित नहीं होने पर विवाद खड़ा हो गया है।

पत्रिका ‘पीकॉक’ के रविवार के संस्करण में दिवंगत वाघ का रेखाचित्र प्रकाशित किया गया है जिसे कलाकार सिद्धेश गौतम ने तैयार किया है लेकिन इसमें ‘सेक्यूलर’ शीर्षक वाली वाघ की कविता नहीं छापी गई है।

गौतम ने दावा किया कि उनसे कविता प्रकाशन के लिए नहीं देने को कहा गया था।

‘एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा’ (ईएसजी) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकिता मिश्रा से जब इस बाबत संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि दिवंगत वाघ की कविता नहीं छापने का निर्णय संपादक स्तर पर लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘‘पीकॉक’ अपनी शुरुआत से कलात्मक स्वतंत्रता का ध्वजवाहक रहा है।’’

ईएसजी हर साल गोवा सरकार की ओर से आईएफएफआई की मेजबानी करता है। दिवंगत वाघ ईएसजी के उपाध्यक्ष रहे थे।

उनके भाई रामराव वाघ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कलात्मक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाला यह फिल्मोत्सव इस कविता को लेकर इस तरह का रवैया रखता है।

कलाकार सिद्धेश गौतम ने यह कविता इंस्टाग्राम पर साझा की है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझसे कहा गया था कि आज के अंक में विष्णु सूर्य वाघ की लिखी कविता प्रकाशन के लिए नहीं दूं। मैंने उनकी कविता ‘सेक्यूलर’ चुनी थी क्योंकि यह शहरों और गांवों में रोजाना कई लोगों से होने वाले जातीय भेदभाव की अनेक घटनाओं को व्यक्त करती है।’’

उन्होंने पोस्ट किया, ‘‘मेरा हैंडल अब भी लोकतांत्रिक है, इसलिए मैं वहां इसे जारी कर रहा हूं। मैंने कई बार अपनी आत्मा पर ऐसे आघात झेलते हुए और बिना किसी सामाजिक, भावनात्मक या वित्तीय पूंजी के अपना रास्ता चुना है और मैं अपने परिश्रम तथा कड़े शब्दों से अपना रास्ता बनाता रहूंगा।’’

उक्त कविता मूल रूप से कोंकणी में लिखी गई थी जिसका अंग्रेजी अनुवाद वाघ के रिश्तेदार कौस्तुभ नाइक ने किया था।

रामराव वाघ ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अगर कविता कला और संस्कृति को समर्पित पत्रिका में प्रकाशित होती तो बड़े सम्मान की बात होती।’’

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