देश की खबरें | महाराष्ट्र में मराठी पाठ्यपुस्तक में क्रांतिकारी सुखदेव का नाम न होने पर विवाद
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पुणे, 17 जुलाई कक्षा आठ की एक मराठी पाठ्यपुस्तक में शहीद भगत सिंह और राजगुरु के साथ क्रांतिकारी सुखदेव का नाम न होने पर पुणे के दो संगठनों ने आपत्ति जताई है।
ब्राह्मण महासंघ और संभाजी ब्रिगेड ने आरोप लगाया कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। ‘मझया देशावर माझे प्रेम आहे’ (मैं अपने देश से प्रेम करता हूं) शीर्षक वाले पाठ में कहा गया है कि भगत सिंह, राजगुरु और कुरबान हुसैन ने देश के लिए अपना बलिदान दिया, लेकिन इसमें सुखदेव का नाम नहीं है।
उल्लेखनीय है कि सांडर्स हत्याकांड में क्रांतिकारी सुखदेव को भगत सिंह और राजगुरू के साथ ही ब्रितानिया हुकूमत ने 23 मार्च 1931 को फांसी दी थी।
किताब में कहा गया है कि भगत सिंह, राजगुरु और कुरबान हुसैन देश के लिए फांसी के फंदे पर चढ़ गए। हालांकि, इसमें यह नहीं कहा गया है कि हुसैन को शहीद ए आजम भगत सिंह और राजगुरु के साथ फांसी दी गई थी।
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संबंधित अध्याय में भगत सिंह और राजगुरु के साथ सुखदेव का नाम न होने पर विवाद है।
राज्य की विद्यालय शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि संबंधित अध्याय 2018 में पाठ्यपुस्तक में उस समय शामिल किया गया था जब राज्य में भाजपा नीत सरकार थी।
उन्होंने कहा कि संबंधित पंक्ति जाने-माने लेखक दिवंगत यदुनाथ की किताब से ली गई है और इसे उनके परिवार की अनुमति के बिना नहीं बदला जा सकता।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पाठ्यक्रम केंद्र की नयी शिक्षा नीति आने के बाद ही बदला जा सकता है।
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