जरुरी जानकारी | पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने पर हो विचार: पीएचडी चैंबर

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नयी दिल्ली, 16 जुलाई उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने तेल के बढ़ते दाम को काबू में लाने के लिये सरकार को सोच-विचार कर कीमत नियंत्रण व्यवस्था बनाने और पेट्रोलियम उत्पादों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने समेत अन्य सुझाव दिये।

पीएचडी चैंबर ने एक बयान में कहा कि तेल की कीमतों में मौजूदा वृद्धि ने समस्या पैदा की है क्योंकि इसका अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

उद्योग मंडल के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा, ‘‘सरकार के लिए गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। तेल के दामों में वृद्धि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी और केंद्र तथा राज्य सरकारों दोनों द्वारा लगाए गए उच्च घरेलू कर ढांचे का नतीजा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘...अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर वाहन ईंधन की खुदरा कीमतों को एकदम से नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कीमतों को नियंत्रित करने के लिये एक विवेकपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए, जिसपर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की सहमति और नियंत्रण हो।’’

अग्रवाल ने कहा, ‘‘....ऐसे समय जब वैश्विक दाम में तेजी और उतार-चढ़ाव हो, सोच-विचार कर कीमत निंयत्रण और निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।’’

उन्होंने यह भी कहा कि एक संभावित तरीका यह है कि केंद्र और सभी राज्य सरकारें आगे आएं और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने को लेकर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक आयोजित करें।

अग्रवाल के अनुसार यह तभी संभव है, जब दोनों सरकारें आगे आयें और मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करें।

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