जरुरी जानकारी | कोल इंडिया से सीएमपीडीआईएल को अलग करने के प्रस्ताव पर विचार के लिये समिति गठित

नयी दिल्ली, आठ जून कोल इंडिया लि. (सीआईएल) ने कंपनी की योजना और डिजाइन इकाई सीएमपीडीआईएल को अलग करने के प्रस्ताव पर विचार करने और सिफारिश देने के लिये पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।

एक आधिकारिक आदेश के अनुसार आंतरिक समिति की सिफारिशों के आधार पर कोल इंडिया कोयला मंत्रालय के समक्ष इस बारे में प्रस्तुती देगी।

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मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि कोल इंडिया से सेंट्रल माइन्स प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लि.(सीएमपीडीआईएल) के अलग होने पर इसका विलय मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉरपोरेशन लि. (एमईसीएल) के साथ होगा। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमईसीएल खनिज खोज कार्यों से जुड़ी है।

कोल इंडिया के हाल के आदेश में कहा गया है कि कोल इंडिया चेयरमैन समिति गठित कर संतुष्ट हैं। समिति को कोल इंडिया और सीएमपीडीआईएल के मौजूदा ढांचे के आकलन के साथ कॉरपोरेट आजादी के अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गयी है।

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इसमें कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर कोल इंडिया कोयला मंत्रालय के समक्ष अपनी बातें रखेगी।

इस बीच, सीएमपीडीआईएल को मूल कंपनी से अलग करने के प्रस्ताव के बारे में कोयला कार्यकारियों के संगठन (एआईएसीई) के प्रधान महासचिव पी के सिंह राठौर ने कहा, ‘‘कर्मचारियों और कार्यकारियों के समायोजन को लेकर मामला पेचीदा होगा क्योंकि दोनों फर्मों में वेतन ढांचे में काफी फर्क है।’’

उन्होंने कहा कि अभी सीएमपीडीआईएल की एक तिहाई आय कोयेला खोज कार्यों से है और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कोल इंडिया की योजना और डिजाइन इकाई का शेष दो तिहाई खोज का का काम भी देश के लिये महत्वपूर्ण है।

कोल इंडिया के मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों के संठन एआईएसीई ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के खोज, योजना और डिजाइन इकाई सीएपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने के प्रस्ताव पर व्यापक तौर पर विचार-विमर्श शुरू किया है।

एआईएसीई ने कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सीएमपीडीआईएल को कोल इंडिया से अलग करने के प्रस्ताव का मकसद निजी परामर्श कंपनियों के लिये रास्ता साफ करना है।

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