देश की खबरें | पेशे की शुचिता के लिए वकीलों के खिलाफ शिकायतों के त्वरित निपटारे की आवश्यकता : न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कानूनी पेशे की शुचिता बरकरार रखने के लिए वकीलों के खिलाफ वादकारियों की शिकायतों के त्वरित निपटारे की आवश्यकता जताई है और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) को 31 दिसम्बर, 2022 तक ऐसी सभी शिकायतों के निपटारे का निर्देश दिया है।
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने कानूनी पेशे की शुचिता बरकरार रखने के लिए वकीलों के खिलाफ वादकारियों की शिकायतों के त्वरित निपटारे की आवश्यकता जताई है और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) को 31 दिसम्बर, 2022 तक ऐसी सभी शिकायतों के निपटारे का निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत ने ऐसी शिकायतों की जांच पूरी करने के लिए तीन माह की और मोहलत देने संबंधी बीसीआई अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा का अनुरोध स्वीकार कर लिया।
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा, ‘‘अंतिम मौके के तौर पर, हम बीसीआई को प्राप्त या हस्तांतरित शिकायतों के निपटारे के लिए 31 दिसम्बर, 2022 तक का समय देते हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि संबंधित राज्यों की विधिज्ञ परिषदों के समक्ष शिकायतें एक वर्ष से अधिक समय से लंबित थीं और उन्हें अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 36 (बी) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए स्थानांतरित किया जाना आवश्यक था, बीसीआई को प्राप्त या हस्तांतरित की गई शिकायतों का जल्द से जल्द निर्णय और निपटारा करना चाहिए।’’
पीठ ने 29 सितम्बर को कहा, ‘‘पेशे का अनुशासन बनाये रखने और शुचिता बरकरार रखने के लिए संबंधित वादकारियों द्वारा की गई शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा करने की आवश्यकता है, ताकि वादिकारियों का भरोसा इस पेशे और इसके तंत्र में बना रहे।’’
शीर्ष अदालत ने एक पक्षकार की उन दलीलों का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि इस तथ्य के बावजूद कि शिकायतें एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं, संबंधित राज्य विधिज्ञ परिषदों ने मामलों को बीसीआई को स्थानांतरित नहीं किया है।
पीठ ने कहा, ‘‘भारतीय विधिज्ञ परिषद को उन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करना चाहिए जो हमारे पहले के आदेश और वर्तमान आदेश द्वारा स्थानांतरित किये गये हैं या स्थानांतरित समझे गए हैं।’’
शीर्ष अदालत ने इससे पहले बीसीआई को निर्देश दिया था कि वह राज्य विधिज्ञ परिषदों को अधिवक्ता अधिनियम की धारा 35 के तहत वकीलों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों को एक साल के भीतर निपटाने के लिए निर्देश जारी करे।
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