विदेश की खबरें | यूक्रेन संकट पर अमेरिका के रुख से भड़का चीन, दहशत पैदा करने का लगाया आरोप
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बुधवार को कहा कि चीन रूस पर नए प्रतिबंधों का विरोध करता है और चीन के पुराने रूख को दोहराता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सीमाओं के आसपास रूसी सैनिकों की तैनाती और आक्रमण की आशंका के जवाब में अमेरिका कीव को हथियार प्रदान करके तनाव बढ़ा रहा है।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बुधवार को कहा कि चीन रूस पर नए प्रतिबंधों का विरोध करता है और चीन के पुराने रूख को दोहराता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सीमाओं के आसपास रूसी सैनिकों की तैनाती और आक्रमण की आशंका के जवाब में अमेरिका कीव को हथियार प्रदान करके तनाव बढ़ा रहा है।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन-रूस संबंध घनिष्ठ हुए हैं। चिनफिंग ने इस महीने की शुरुआत में बीजिंग में वार्ता के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी की थी।
दोनों पक्षों ने पूर्व सोवियत गणराज्यों में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के विस्तार के लिए रूस की आपत्ति का समर्थन करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया और ताइवान के स्व-शासित द्वीप पर चीन के दावे का समर्थन किया। हुआ ने कहा कि यूक्रेन पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव को कम करने के लिए बीजिंग बहुपक्षीय वार्ता चाहता है। उन्होंने अमेरिका, फ्रांस और अन्य द्वारा रूस को वार्ता की मेज पर लाने के प्रयासों का उल्लेख नहीं किया।
मास्को : यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने आक्रामक रुख को लेकर रूस पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की बुधवार को मांग की।
कुलेबा ने ट्वीट किया, ‘‘पुतिन को और आक्रामकता से रोकने के लिए हम भागीदारों से रूस पर अब और प्रतिबंध लगाने का आह्वान करते हैं।’’ उन्होंने पिछले दिन मास्को पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। लेकिन उन्होंने देशों से रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव और बढ़ाने का आग्रह किया। कुलेबा ने ट्वीट किया, ‘‘उनकी अर्थव्यवस्था और सहयोगियों पर प्रहार करें। जोरदार प्रहार करें। अभी करें।’’
लंदन: ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रूस ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की गति और पैमाने का बचाव करते हुए कहा कि सरकार यूक्रेन में बड़े स्तर पर घुसपैठ की स्थिति में इस्तेमाल के लिए कुछ उपायों को सुरक्षित रख रही है।
ट्रूस ने ‘स्काई न्यूज’ को बताया कि पश्चिमी ताकतें पुतिन की महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए कुछ प्रतिबंधों को ‘‘सुरक्षित’’ रखना चाहती हैं। ब्रिटिश अधिकारियों ने कहा है कि वे आगे बढ़ने का फैसला करने से पहले सेना की गतिविधियों को सत्यापित करने का प्रयास करेंगें।
ट्रूस ने कहा, ‘‘हमने पुतिन से सुना है कि वह सैनिकों को भेज रहे हैं। हालांकि, हमारे पास अभी तक पूरा सबूत नहीं है कि क्या ऐसा हुआ है। हमें कीव सहित अन्य जगहों पर बड़े पैमाने पर आक्रमण की आशंका है।’’
ब्रिटेन के विपक्षी नेताओं और रक्षा विशेषज्ञों ने कड़े प्रतिबंध नहीं लगाने के लिए सरकार की आलोचना की है, खासकर जब अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) ने रूस के खिलाफ अधिक आक्रामक तरीके से कदम उठाया।
वेटिकन सिटी : पोप फ्रांसिस ने रूस-यूक्रेन विवाद में सभी पक्षों से ईश्वर के समक्ष अपनी अंतरात्मा की सुनने और युद्ध के खतरों से पीछे हटने का आग्रह किया है।
बुधवार को अपने साप्ताहिक सभा के अंत में एक अपील में फ्रांसिस ने कहा कि वह यूक्रेन में घटनाक्रम से दुखी और चिंतित हैं, जिसे उन्होंने ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून का अनादर’’ कहा। हालांकि, उन्होंने यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों के जमावड़े या यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों की ‘‘स्वतंत्रता’’ को मान्यता देने का उल्लेख नहीं किया। अपने संदेश में फ्रांसिस ने कहा, ‘‘एक बार फिर निहित स्वार्थों से सबके लिए शांति को खतरा है।’’
वेटिकन रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च से संपर्क करने तथा उसके नेता पैट्रिआर्क किरिल और फ्रांसिस के बीच दूसरी बैठक बुलाने के प्रयासों के साथ कूटनीतिक और धर्म के रास्ते का अनुसरण कर रहा है।
कैनबरा : ऑस्ट्रेलिया ने रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है और कारोबारियों को रूसी साइबर हमले के जरिए जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को लेकर आगाह भी किया है।
प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बुधवार को कहा कि लक्षित वित्तीय प्रतिबंध और यात्रा पाबंदी यूक्रेन के प्रति रूसी आक्रामकता के जवाब में पहली कार्रवाई होगी।
ऑस्ट्रेलिया और रूस ने 2014 से एक-दूसरे पर प्रतिबंध लगाए हैं। यूक्रेन संघर्ष में रूस की भागीदारी के विरोध में ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रतिबंधों की शुरुआत की गई थी। मॉरिसन की कैबिनेट में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने प्रतिबंधों और यात्रा बंदिशों को मंजूरी दी जो रूसी सुरक्षा परिषद के आठ सदस्यों को लक्षित करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया पिछले प्रतिबंधों का विस्तार करने तथा दो रूसी बैंकों को लक्षित करने के अमेरिका और ब्रिटेन की कवायद के साथ भी जुड़ने पर सहमत हुआ है।
वेलिंगटन : न्यूजीलैंड की सरकार ने रूसी राजदूत जॉर्जी जुएव को बुधवार को शीर्ष राजनयिक अधिकारियों से मिलने के लिए बुलाया, जो रूस से यूक्रेन संकट को लेकर राजनयिक वार्ता पर लौटने का आग्रह कर रहे हैं।
न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानैया महुता वर्तमान में देश से बाहर हैं, लेकिन एक बयान में कहा गया कि राजदूत को ‘‘हाल के दिनों में रूस द्वारा की गई कार्रवाइयों के लिए न्यूजीलैंड की कड़ी आपत्ति को दर्ज कराने और यूक्रेन क्षेत्र में रूसी आक्रमण की निंदा से अवगत कराने के लिए बुलाया गया।
सियोल : बढ़ते संकट के बीच दक्षिण कोरिया की यूक्रेन में सैनिकों या अन्य प्रकार की सैन्य सहायता भेजने की कोई योजना नहीं है, लेकिन उसका कहना है कि वह रूस के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में आर्थिक रूप से दबाब बनाने के अभियान में शामिल हो सकता है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि सियोल अपनी संभावित कार्रवाइयों पर विचार कर रहा है लेकिन ‘‘सैन्य सहायता या सेना की तैनाती में शामिल नहीं होगा।’’
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यूक्रेन संकट पर ‘‘गंभीर चिंता’’ व्यक्त की और राजनयिक समाधान की मांग करते हुए पूर्वी यूक्रेन में शांति बहाल करने के उद्देश्य से संबंधित देशों से मिंस्क समझौतों का सम्मान करने का आह्वान किया।
तोक्यो : जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने रूस और उसके द्वारा यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों की ‘‘स्वतंत्रता’’ को मान्यता देने पर प्रतिबंधों की घोषणा की है। किशिदा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ‘‘यूक्रेन में रूस द्वारा की जा रही कार्रवाई’’ के जवाब में जापान में रूसी सरकार के बॉन्ड को जारी करने तथा इसके वितरण पर प्रतिबंध लगाएगी।
उन्होंने कहा कि जापान यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों से जुड़े लोगों को वीजा जारी करना भी रोक देगा, जापान में उनकी संपत्ति पर रोक लगा देगा तथा दोनों क्षेत्रों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगा देगा। किशिदा ने रूस की ‘‘कड़ी निंदा’’ करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन किया है।
संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने यूक्रेन की सीमा पर सैनिकों की तैनाती के लिए पुतिन की आलोचना की और कहा कि दुनिया हाल के वर्षों में ‘वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर सबसे बड़े संकट’ का सामना करना रही है।
गुतारेस ने पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने के पुतिन के फैसले और इन सैनिकों को शांतिरक्षक बताए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं शांति स्थापना की अवधारणा के विकृत होने के बारे में भी चिंतित हूं। मुझे संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों की उपलब्धियों पर गर्व है, जिनके तहत बड़ी संख्या में शांतिरक्षक बलों ने नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।’’ गुतारेस ने कहा, ‘‘जब एक देश के सैनिक दूसरे देश में उसकी सहमति के बिना प्रवेश करते हैं तो वे निष्पक्ष शांतिदूत नहीं होते हैं। वे बिल्कुल भी शांतिदूत नहीं हैं।’’ उन्होंने रूस के कदम को यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन और मिंस्क समझौते के लिए ‘बड़ा झटका’ करार दिया।
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