जरुरी जानकारी | चीन, आसियान देशों से कागज के आयात पर नियंत्रण लागू करने की जरूरत: कागज उद्योग

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में कागज बनाने वाली कंपनियों के संगठन इंडियन पेपर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए)ने सरकार से घरेलू फर्मों के हितों की रक्षा के लिये चीन एवं अन्य देशों से कागज के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने का आग्रह किया है।

नयी दिल्ली, सात जुलाई देश में कागज बनाने वाली कंपनियों के संगठन इंडियन पेपर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए)ने सरकार से घरेलू फर्मों के हितों की रक्षा के लिये चीन एवं अन्य देशों से कागज के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने का आग्रह किया है।

पीएमए ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि उसने इस बाबत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को लिखकर चीन और आसियान से कागज के अंधाधुंध आयात पर लगाम लगाने और कागज के आयात को ‘मुक्त’ की जगह रिस्ट्रिक्टेड (नियंत्रित) श्रेणी में रखने की मांग की है।

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संगठन का कहना है कि उसने कागज के वास्तविक उपयोगकर्ताओं को ही लाइसेंस के आधार पर ही आयात की अनुमति देने का सुझाव दिया है।

संगठन ने सरकारी आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में कुल कागज आयात 11 प्रतिशत बढ़कर 16 लाख टन हो गया। इसी अवधि में चीन से होने वाला आयात 14 प्रतिशत बढ़कर लगभग 3 लाख टन रहा।

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बयान के अनुसार वहीं आसियान और दक्षिण कोरिया से होने वाला कागज आयात आलोच्य वर्ष में क्रमशः 18 प्रतिशत और 9 प्रतिशत बढ़ा है।

भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है जबकि कोरिया के साथ भारत का व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) है। इन दोनों क्षेत्रों से आयात पर शुल्क शून्य है। वहीं चीन से होने वाले आयात पर एपीटीए (एशिया-प्रशांत व्यापार समझौता) के तहत ज्यादातर ‘पेपर ग्रेड’ पर 30 प्रतिशत का ‘मार्जिन ऑफ प्रेफरेंस’ मिलता है।

आईपीएमए के अध्यक्ष ए एस मेहता ने कहा, ‘‘कागज ऐसे विनिर्माण क्षेत्रों में शामिल, जिस पर आयात का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। भारत में कई छोटे पेपर मिल और कुछ बड़े पेपर मिल भी वाणिज्यिक रूप से टिकाऊ नहीं रह पाने के कारण बंद हो गए, जिससे हजारों लोगों का रोजगार चला गया। देश में कागज उत्पादन की क्षमता पर्याप्त है, लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।’’

उन्होंने बयान में कहा, ‘‘आसियान देशों और चीन के कागज विनिर्माताओं को सस्ता कच्चा माल मिल जाता है और उन देशों में कंपनियों को प्रोत्साहन और सब्सिडी भी मिलती है। ऐसे में इन देशों से शून्य आयात शुल्क या प्राथमिकता के आधार पर आयात को मंजूरी देने से घरेलू बाजार में भारतीय विनिर्माताओं को बराबरी का मौका नहीं मिल पाता है।’’

मेहता ने कहा, ‘‘भारत दुनिया में पेपर और पेपरबोर्ड का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। यहां सालाना 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। शिक्षा और साक्षरता पर सरकार की ओर से जोर दिए जाने के कारण यहां पेपर एवं पेपरबोर्ड की मांग बढ़ी है....पर सस्ते आयात के कारण पूरी हो जा रही है और घरेलू विनिर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।’’

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