देश की खबरें | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे बड़े पारंपरिक सैन्य निर्माण में संलग्न है चीन : ऑस्ट्रेलिया

कोलकाता, 26 सितंबर ऑस्ट्रेलिया के एक शीर्ष राजनयिक ने मंगलवार को दावा किया कि चीन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से पारंपरिक रूप से अपनी सैन्य क्षमता और ताकत को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन उसके इस रणनीतिक उद्देश्य की वजह स्पष्ट नहीं है।

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने कहा, ‘‘ चीन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे बड़े पैमाने पर पारंपरिक रूप से अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के कार्य में जुटा हुआ है। चीन ने इसके लिए अपने रणनीतिक उद्देश्यों या आश्वस्त करने वाले राजकीय कारणों को स्पष्ट नहीं किया है। ’’

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने एक मुश्किल दौर के बाद चीन के साथ अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश की है।

ग्रीन ने ‘कोलकाता संवाद - ऑस्ट्रेलिया और भारत: द्वीप राज्य को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करना’ नामक विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही।

ग्रीन ने कहा, ‘‘ स्पष्ट रूप से, ऑस्ट्रेलिया चीन के साथ अपने सार्थक जुड़ाव को महत्व देता है और हमने आपसी संबंधों के एक मुश्किल दौर के बाद अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश की है। बातचीत फिर से शुरू हो गई है, जिसमें रक्षा का महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल है।’’

दरअसल, चीन का अपने लगभग सभी पड़ोसियों के साथ समुद्री और जमीनी सीमाओं पर विवाद है, जिसमें दक्षिण चीन सागर भी शामिल है, जो ऑस्ट्रेलिया के लिए विशेष रूचि का क्षेत्र है।

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