विदेश की खबरें | बचपन में सांस संबंधी संक्रमण से वयस्क होने पर श्वसन रोगों से मौत का जोखिम अधिक: लांसेट
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लंदन, आठ मार्च शैशवावस्था में श्वसन संबंधी संक्रमण होने पर 26 से 73 साल की आयु के बीच सांस संबंधी किसी बीमारी से मौत का जोखिम बढ़ जाता है। लांसेट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

अध्ययन के मुताबिक श्वसन संबंधी रोगों से समय-पूर्व मृत्यु के कुल मामले कम हैं, लेकिन दो साल की उम्र तक ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसे निचली श्वसन नलिका संक्रमण (एलआरटीआई) से ग्रसित होने वाले लोगों के वयस्क होने पर सांस संबंधी बीमारी से समय-पूर्व मृत्यु का खतरा 93 प्रतिशत अधिक होता है, भले ही सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि कैसी भी हो।

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि सांस की पुरानी बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या हैं और 2017 में दुनियाभर में मृत्यु के सभी मामलों में करीब 39 लाख मौत के मामले श्वसन रोगों से जुड़े थे।

उन्होंने कहा कि इन 39 लाख मामलों में अधिकतर मामले क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) के थे।

अध्ययन के अनुसार शिशुओं में एलआरटीआई होने के बाद उन्हें वयस्क अवस्था में फेफड़ों का संक्रमण, दमा और सीओपीडी का खतरा होता है। हालांकि, पहले यह स्पष्ट नहीं था कि वयस्क आयु में समय पूर्व मृत्यु का इससे कोई लेनादेना है या नहीं।

ताजा अनुसंधान इस विषय पर पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें पूरे जीवनकाल में शोध किया गया।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और इंपीरियल कॉलेज, लंदन के जेम्स एलिनसन ने कहा, ‘‘वयस्क श्वसन रोगों के लिए मौजूदा एहतियाती उपायों में धूम्रपान जैसे जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।’’

उनका संकेत इस ओर था कि पहली बार इस अध्ययन में जन्म के कुछ महीने बाद से मृत्यु तक सांस संबंधी संक्रमण और रोगों के बीच संबंध का पता लगाने का प्रयास किया गया।

अध्ययन में ब्रिटेन के ‘नेशनल सर्वे ऑफ हेल्थ एंड डवलपमेंट’ के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इनमें 1946 में जन्मे लोगों को शामिल किया गया और 2019 तक उनके स्वास्थ्य और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल की गयी।

अध्ययन में 3,589 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिनमें से 25 प्रतिशत को दो साल की उम्र से पहले एलआरटीआई था। 2019 के अंत तक 19 प्रतिशत प्रतिभागियों की 73 साल की उम्र पूरी होने से पहले मृत्यु हो गयी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)