देश की खबरें | मुख्य सचिव मारपीट मामला : मुख्यमंत्री और अन्य पर आरोप तय करने के लिए बहस की अनुमति मिली

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने तत्कालीन मुख्य सचिव के साथ कथित मारपीट मामले में सोमवार को निचली अदालत में आरोप तय करने के लिए बहस की अनुमति दे दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने तत्कालीन मुख्य सचिव के साथ कथित मारपीट मामले में सोमवार को निचली अदालत में आरोप तय करने के लिए बहस की अनुमति दे दी।

इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आरोपी हैं।

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उच्च न्यायालय ने यह अनुमति तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के अनुरोध पर दिया। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने 14 अप्रैल 2019 को दिए अपने आदेश को भी संशोधित किया जिसमें निचली अदालत को इस मामले में सुनवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति विभू बाखरु ने आदेश में कहा, ‘‘जहां तक 14 मार्च 2019 का आदेश है, उसमें संशोधन किया जाता है और निचली अदालत अब सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करते हुए आरोप तय करने के लिए दोनों पक्षों की जिरह सुन सकती है।’’

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प्रकाश ने अपनी याचिका में उच्च न्यायाल में केजरीवाल और सिसोदिया द्वारा दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई का निर्देश देने का भी अनुरोध किया। केजरीवाल और सिसोदिया ने याचिका में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि मामले की जांच दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त से नीचे के पद का अधिकारी नहीं कर सकता।

आम आदमी पार्टी (आप) के दोनों नेताओं ने निचली अदालत के 22 अक्टूबर 2018 के फैसले को भी चुनौती दी है जिसमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी द्वारा अदालत से संबंद्ध नियमित लोक अभियोजक के बजाय दो अन्य वकीलों को अभियोजन की कार्यवाही करने की अनुमति दी गई है।

उच्च न्यायालय ने हालांकि, रेखांकित किया कि याचिका को सुनवाई के लिए दो नवंबर को सूचीबद्ध किया गया है, इसलिए उससे पहले इसपर सुनवाई संभव नहीं है।

सुनवाई के दौरान प्रकाश का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि समय बचाने के लिए अगर आरोप तय करने के लिए सुनवाई होती है और नियमित लोक अभियोजक पक्ष रखते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन और एन हरिहरन ने कहा कि निचली अदालत द्वारा नियमित लोक अभियोजक द्वारा मामले को रखे जाने पर उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं है।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के 22 नवंबर 2018 के आदेश के खिलाफ आप नेताओं की याचिका पर दिल्ली सरकार, पुलिस और प्रकाश को नोटिस जारी किये थे।

गौरतलब है कि 22 अक्टूबर 2018 को निचली अदालत ने प्रकाश का यह अनुरोध स्वीकार कर लिया था जिसमें उन्होंने मामले में पक्ष आप सरकार द्वारा तैयार पैनल के वकीलों के बजाय दिल्ली पुलिस द्वारा नामित वकीलों के जरिये रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

प्रकाश के मुताबिक 19 फरवरी 2018 को केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर बैठक के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उनकी शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। केजरीवाल, सिसोदिया और नौ अन्य आप विधायकों को 25 अक्टूबर 2018 को निचली अदालत ने जमानत दी।

वहीं मामले में गिरफ्तार दो आरोपी विधायक अमानतुल्ला खान और प्रकाश जरवाल को उच्च न्यायालय से जमानत मिली।

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