छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्र से लौह अयस्क रियायती कीमतों पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया
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नयी दिल्ली, 13 मई छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के स्पॉन्ज आयरन विनिर्माताओं को लौह अयस्क रियायाती मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

बघेल ने इस बारे में इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे पत्र में कहा एनएमडीसी द्वारा जनवरी, 2020 में तय किए गए लौह अयस्क के मूल्य को वापस लेने का आग्रह किया है।

पत्र में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इस्पात और स्पॉन्ज आयरन उद्योग के अलावा अन्य छोटे उद्योगों को छत्तीसगढ़ में एनएमडीसी की खानों से लौह अयस्क की खरीद में काफी परेशानी आ रही है। इससे राज्य में इस्पात उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

स्पॉन्ज आयरन या डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) का इस्तेमाल अर्द्ध तैयार इस्पातउ उत्पादइ, इन्गोट और बिलेट के निर्माण में होता है। आगे इनका इस्तेमाल विभिन्न तैयार इस्पात उत्पाद बनाने में होता है।

स्पॉन्ज आयरन के उत्पादन में मुख्य रूप से लौह अयस्क और नॉन-कोकिंग कोयले का इस्तेमाल होता है।

एनएमडीसी ने 20 जनवरी को बीएसई को भेजी को भेजी सूचना में कहा कि उसने लंप्स या उच्च ग्रेड के लौह अयस्क का दाम 2,800 रुपये प्रति टन से 400 रुपये बढ़ाकर 3,200 रुपये प्रति टन कर दिया है। इसी तरह लौह अयस्क फाइंस का दाम 350 रुपये बढ़ाकर 2,560 रुपये प्रति टन से 2,910 रुपये प्रति टन किया गया है।

हालांकि, उसके बाद से एनएमडीसी ने कीमतों में कई बार कटौती की है। बीते मंगलवार को कंपनी ने लंप्स का दाम 400 रुपये घटाकर 2,250 रुपये प्रति टन और फाइंस का दाम भी 400 रुपये घटाकर 1,960 रुपये प्रति टन कर दिया है।

इस्पात मंत्री को 12 मई को लिखे पत्र में बघेल ने एनएमडीसी द्वारा लौह अयस्क की कीमतों में की गई वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्पॉन्ज आयरन उद्योग को लौह अयस्क की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने दीर्घावधि के लिए लौह अयस्क की रियायती कीमतें तय करने का भी आग्रह किया है।

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