देश की खबरें | ‘रथ के सारथी’ आडवाणी ने कहा : मंदिर ‘वास्तविक’ और ‘छद्म’ धर्मनिरपेक्षता के संघर्ष का प्रतीक है
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व उपप्रधानमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर के मुख्य शिल्पकार लालकृष्ण आडवाणी बुधवार को नया इतिहास बनता देखेंगे। उनकी ‘रथ यात्रा’ ने रामजन्मभूमि आंदोलन को दिशा दी थी।
नयी दिल्ली, चार अगस्त पूर्व उपप्रधानमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर के मुख्य शिल्पकार लालकृष्ण आडवाणी बुधवार को नया इतिहास बनता देखेंगे। उनकी ‘रथ यात्रा’ ने रामजन्मभूमि आंदोलन को दिशा दी थी।
95 वर्षीय नेता ने अपनी आत्मकथा में कहा कि मंदिर ‘‘वास्तविक धर्मनिरपेक्षता और छद्म धर्मनिरपेक्षता के बीच संघर्ष’’ का प्रतीक है। 1990 में उनकी ‘राम रथ’ यात्रा ने उन्हें हिंदुत्ववादी राजनीति का चेहरा बनाया और भाजपा के लिए समर्थन जुटाने में यह काफी सहायक सिद्ध हुआ।
आडवाणी उम्र के कारण ‘भूमि पूजन’ में अयोध्या नहीं जाएंगे।
उन्होंने 2008 में अपनी आत्मकथा ‘‘मेरा देश, मेरा जीवन’’ में उम्मीद जताई थी कि राष्ट्रीय एकता में यह नया अध्याय लिखेगा।
अपनी किताब में उन्होंने राम मंदिर को गुजरात में सोमनाथ मंदिर से जोड़ा। अधिकतर हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। आडवाणी ने अपनी रथ यात्रा सोमनाथ से शुरू की थी।
आडवाणी ने अपनी किताब में लिखा है कि सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटा गया और नष्ट किया गया था जिसका पुनर्निर्माण सरदार पटेल की देखरेख में 1951 में हुआ और यह विदेशी हमलों से भारत का इतिहास नष्ट करने के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता और अपनी खोई सांस्कृतिक धरोहर को प्राप्त करने का जीवंत उदाहरण है।
आडवाणी ने सितम्बर 1990 में सोमनाथ से ‘रथ यात्रा’ की शुरुआत की थी जिससे उनकी पार्टी को राजनीतिक शक्ति हासिल हुई और इसकी किस्मत हमेशा के लिए बदल गई। यात्रा में उनके साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे।
आडवाणी ने अपनी ‘रथयात्रा’ को अपने राजनीतक यात्रा का सर्वाधिक ‘निर्णायक बदलाव’ बताया।
‘यात्रा’ को गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तरप्रदेश होते हुए अयोध्या में समाप्त करने की योजना थी। लेकिन 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी की गिरफ्तारी के साथ ही यह समाप्त हो गई थी।
बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव के आदेश पर उन्हें गिरफ्तार कर दुमका के नजदीक सिंचाई विभाग के बंगले में रखा गया।
यात्रा जहां से भी गुजरी वहां ‘‘जय श्री राम’’, ‘‘सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे’’ और ‘‘जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा’’ जैसे नारे गूंजते थे। इस कारण सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और तनाव हुआ और कुछ जगहों पर दंगे भी हुए।
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