विदेश की खबरें | कोरोना वायरस की जीन में परिवर्तन के चलते जांच के नतीजों में दिख रहा अंतर: अध्ययन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. वैज्ञानिकों ने अनुसंधान में पाया है कि वर्तमान में कोविड-19 की जांच के लिए किए जा रहे 27 प्रकार के परीक्षण के नतीजों में असमानता कोरोना वायरस के अपने जीन के स्वरूप को बदलने (म्यूटेट) के कारण दिख रही है।
टोरंटो, 11 जून वैज्ञानिकों ने अनुसंधान में पाया है कि वर्तमान में कोविड-19 की जांच के लिए किए जा रहे 27 प्रकार के परीक्षण के नतीजों में असमानता कोरोना वायरस के अपने जीन के स्वरूप को बदलने (म्यूटेट) के कारण दिख रही है।
उन्होंने जांच के तरीकों के प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन करने के प्रति सचेत किया है।
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रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार जांच के बहुत से तरीके विषाणु के फैलने के आरंभिक चरण में विकसित किए गए थे जब कोरोना वायरस की पहली बार पहचान की गई थी और उसके जीन अनुक्रम का पता लगाया गया था।
कनाडा स्थित यॉर्क विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 के जांच के तरीकों का एक निश्चित समय के बाद पुनर्मूल्यांकन करना जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनसे संतोषजनक नतीजे मिल रहे हैं।
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अध्ययन करने वालों में से एक काशिफ अजीज खान ने कहा, “कोविड-19 की जांच करने के लिए मरीज में विषाणु का पता लगाने के वास्ते पीसीआर पद्धति का इस्तेमाल होता है। लेकिन यदि विषाणु अपने जीन में परिवर्तन कर लेगा तो जांच के नतीजों में अंतर दिखेगा। यह चिंता का विषय है क्योंकि ऐसा हो सकता है कि जांच पद्धति विषाणु के हर स्वरूप का पता लगा सकने में अक्षम हो और इस वजह से जांच नतीजों में अंतर दिखाई पड़ सकता है।”
अनुसंधानकर्ताओं ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि जांच पद्धति और कोरोना वायरस के जीन में अंतर को पता लगाकर यदि सही कर लिया जाता है तो इससे जांच की सटीकता में सुधार हो सकता है।
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