नयी दिल्ली, 27 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बब्बर खालसा के आतंकवादी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा। हवारा 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
हवारा ने खुद को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने हवारा की याचिका पर केन्द्र, दिल्ली और पंजाब सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में सिंह की हत्या से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस घटना में 16 अन्य लोग भी मारे गए थे।
उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में हवारा का आचरण ठीक रहा है, सिवाय एक कथित घटना को छोड़कर जिसमें वह 22 जनवरी 2004 को जेल में सुरंग खोदकर फरार हो गया था और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
पीठ ने हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस से पूछा, ‘‘आप (हवारा) सुरंग खोदने में कैसे सफल रहे?’’
गोंजाल्विस ने कहा, ‘‘आज, मुख्य घटना को हुए लगभग 30 साल और जेल से भागने की घटना को हुए 20 साल हो गये हैं।’’
पीठ ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए निर्धारित किया।
अधिवक्ता सत्य मित्रा के माध्यम से दायर याचिका में हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है और कहा गया है कि उसके खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में कोई मामला लंबित नहीं है।
याचिका में प्रतिवादियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे हवारा के आज तक के कारावास के दौरान जेल में उसके आचरण के संबंध में संपूर्ण रिकार्ड अदालत के समक्ष पेश करें।
इसमें कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता (हवारा) वर्तमान में पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है... वह पंजाब राज्य, फतेहगढ़ साहिब जिले का मूल निवासी है, और उसे पंजाब की जेल में रखा जाना चाहिए।’’
याचिका में दावा किया गया कि बेअंत सिंह की हत्या के बाद याचिकाकर्ता पर 36 झूठे मामले थोपे गए और एक मामले को छोड़कर सभी में उसे बरी कर दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि इनमें से एक व्यक्ति, जिसे उसी हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था तथा जो जेल से भागने की घटना में भी शामिल था, को तिहाड़ जेल से चंडीगढ़ की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।
एक निचली अदालत ने मार्च 2007 में इस मामले में हवारा को मौत की सजा सुनाई थी।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और साथ ही निर्देश दिया था कि उसे शेष जीवन तक जेल से रिहा नहीं किया जाएगा।
हवारा की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उसके और अभियोजन पक्ष द्वारा दायर अपीलें उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।
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