नयी दिल्ली, 20 मई दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर जारी विवाद एक बार फिर उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह दिल्ली में सेवा विवाद के मुद्दे पर 11 मई के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली सरकार के पास सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि मामलों को छोड़कर सेवाओं से संबंधित मामलों में विधायी और कार्यकारी शक्तियां हैं।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति से संबंधित केंद्र के अध्यादेश को ‘‘असंवैधानिक’’ और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए शनिवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार उच्चतम न्यायालय में केंद्र के इस कदम को चुनौती देगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने सेवाओं के मामले पर नियंत्रण को लेकर उच्चतम न्यायालय के साथ सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि यह अध्यादेश दिल्ली में निर्वाचित सरकार को सेवाओं के मामले में नियंत्रण देने वाले उसके फैसले को ‘‘पलटता’’ है।
केंद्र ने शुक्रवार को दिल्ली में समूह-ए के अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना के लिए एक प्राधिकरण बनाने के वास्ते अध्यादेश जारी किया था। पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि मामलों को छोड़कर अन्य सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली की निर्वाचित सरकार को देने के न्यायालय के फैसले के एक सप्ताह बाद केंद्र का अध्यादेश आया।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह उच्चतम न्यायालय का ‘अपमान’ और अवमानना है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हर बार जब भी अदालत केंद्र के खिलाफ कोई फैसला सुनायेगी, तो वे उसे पलट देंगे।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले से संबंधित अध्यादेश का बचाव किया और कहा कि यह संविधान और इस मामले में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप है।
केंद्र सरकार के सूत्रों ने दावा किया है कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार द्वारा लगातार ‘‘उकसाए’’ जाने और केंद्र पर ‘‘तीखे हमले’’ किए जाने के कारण वरिष्ठ लोक सेवकों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण के मामले देखने के लिए एक विशेष प्राधिकरण का गठन करने संबंधी अध्यादेश लाने पर मजबूर हुई।
केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह दिल्ली में सेवा विवाद के मुद्दे पर 11 मई के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि निर्णय में त्रुटियां हैं और इसमें समीक्षा याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत मामले पर विचार नहीं किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 मई को एक सर्वसम्मत फैसले में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विवाद को खत्म कर दिया था, जो 2015 की केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना से शुरू हुआ था।
केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सेवाओं के मामले में केंद्र का अध्यादेश असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ है। हम इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उच्चतम न्यायालय के अवकाश के लिए बंद होने के कुछ ही घंटों बाद सेवाओं के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को पलटने के लिए केंद्र ने अध्यादेश जारी किया।’’
‘आप’ के संयोजक ने विपक्षी दलों से संबंधित विधेयक को राज्यसभा से पारित नहीं होने देने की अपील की और कहा कि वह इन दलों के नेताओं से भी मिलेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी दिल्ली में लोगों के घर-घर जाऊंगा और ‘आप’ भी अध्यादेश के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी, क्योंकि यह दिल्ली की जनता की ताकत छीन रहा है।’’
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार, ‘आप’ सरकार के काम में बाधा डालना चाहती है।
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अध्यादेश लाने के वास्ते केंद्र सरकार पर निशाना साधने के लिए केजरीवाल पर पलटवार किया।
भाटिया ने संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने कहा था कि यदि ‘‘संसद किसी विषय पर कार्यकारी शक्ति प्रदान करने वाला कानून बनाती है’’, तो उपराज्यपाल की शक्ति को तदनुसार संशोधित किया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यह अध्यादेश जनहित में है। इस अध्यादेश को छह महीने के अंदर संसद की मंजूरी चाहिए होगी।
भाटिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘आपने न तो संविधान पढ़ा है और न ही उच्चतम न्यायालय का फैसला। आपको लगता है कि अरविंद केजरीवाल जो कुछ भी कहते हैं, वह देश के संविधान से ऊपर है।’’
भाटिया ने कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, संविधान के अनुच्छेद 239एए के अनुसार संसद इस क्षेत्र पर विशेष अधिकार रखती है। यह दिल्ली ‘‘अरविंद क्षेत्र’’ नहीं है और इसे संविधान द्वारा चलाया जाएगा, उनकी मर्जी से नहीं।”
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और पदस्थापना के संबंध में केंद्र द्वारा लाया गया अध्यादेश ‘‘पारदर्शिता और जवाबदेही’’ सुनिश्चित करने के लिए है।
उन्होंने पटना में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमें अध्यादेश लाना पड़ा क्योंकि उच्चतम न्यायालय के फैसले के कुछ दिनों के भीतर दिल्ली सरकार ने 2010 बैच के आईएएस अधिकारी वाई के राजशेखर का तबादला कर दिया जो ‘‘शीशमहल’’ में अनियमितताओं की जांच कर रहे थे।’’
प्रसाद का इशारा दिल्ली के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के नवीनीकरण पर भारी खर्च की ओर था।
उन्होंने कहा कि अध्यादेश के अनुसार जो समिति अब इस तरह के तबादलों और पदस्थापना की सिफारिश करेगी उसकी अध्यक्षता अभी भी दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा की जाएगी।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और यहां जो कुछ भी होता है उसका प्रभाव पूरे देश और दुनिया पर पड़ता है।
सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की गरिमा बनाए रखने के लिए अध्यादेश जरूरी था।
सूत्रों ने कहा कि जब 1991 में दिल्ली को एक संवैधानिक संशोधन द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) घोषित किया गया था, तो यह अवधारणा स्पष्ट कर दी गई थी कि चूंकि दिल्ली केंद्र सरकार की सीट है, इसलिए दोहरी सत्ता एवं जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि दिल्ली एक अनूठी स्थिति वाला केंद्र शासित प्रदेश है, और केंद्र सरकार पूरे देश के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का एक विशेष चरित्र है जो केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने की अनुमति देता है कि स्थानीय हितों पर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए।
सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय संसाधनों एवं विशेषज्ञता तक पहुंच है, जिसका दिल्ली के प्रबंधन और विकास में प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि शहर के लिए नीतियां और निर्णय राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ अनुसार हों ताकि बेहतर आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे का विकास और सांस्कृतिक संरक्षण हो सके।
सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठन हैं, ऐसे में केंद्र सरकार का नियंत्रण अन्य देशों की सरकारों के साथ प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करता है और इन राजनयिक संस्थाओं के सुचारू कामकाज को संभव बनाता है।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में यही व्यवस्था है।
सूत्रों ने कहा कि अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी सी संघीय सरकार के सीधे नियंत्रण में है तथा इसमें केवल एक महापौर होता है और कोई निर्वाचित सरकार नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की राजधानी ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र (एसीटी) में स्थित है और संघीय सरकार के नियंत्रण में है।
दिल्ली की मंत्री आतिशी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार का यह अध्यादेश दर्शाता है कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को (दिल्ली के) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल’’ और ईमानदार राजनीति की ताकत से ‘‘डर लगता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली सरकार को दिए गए अधिकार को छीनने का यह दुस्साहसिक प्रयास देश के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर सरासर हमला है।’’
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिल्ली में नौकरशाहों के तबादले संबंधी केंद्र के अध्यादेश को लेकर भाजपा पर निशाना साधा साधते हुए कहा कि अगर संविधान में ‘‘लोकतंत्र के कातिलों’’ के लिए सजा का प्रावधान होता तो पूरी पार्टी को ‘‘फांसी दी जा सकती थी’’।
मान की यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा ‘दानिक्स’ (दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली (सिविल) सेवा) कैडर के ‘ग्रुप-ए’ अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के वास्ते ‘राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण’ गठित करने के लिए अध्यादेश जारी करने के एक दिन बाद आई है।
मान ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘अगर भारतीय संविधान में लोकतंत्र के कातिलों को सजा का प्रावधान होता तो पूरी भाजपा को फांसी की सजा हो सकती थी।’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में नौकरशाहों के तबादले पर केंद्र का अध्यादेश सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है।
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