देश की खबरें | सहकारी बैंकों पर अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब दें केंद्र, आरबीआई : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में दो सहकारी बैंकों द्वारा बैंकिंग नियामक (संशोधन) अध्यादेश, 2020 की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को चार हफ्तों के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चेन्नई, 20 जुलाई मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में दो सहकारी बैंकों द्वारा बैंकिंग नियामक (संशोधन) अध्यादेश, 2020 की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को चार हफ्तों के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश ए पी शाही और न्यायमूर्ति सेंथिल कुमार रामामूर्ति की प्रथम पीठ ने बिग कांचीपुरम कोऑपरेटिव टाउन बैंक लिमिटेड और वेलूर कोऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया जिन्होंने 26 जून को लाए गए अध्यादेश के प्रावधानों को चुनौती दी थी।

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पीठ ने कहा, “….जब तक सोसाइटी के मामलों के संचालन में याचिकाकर्ता बैंकों के अधिकारों पर वास्तव में अतिक्रमण का संकेत देने वाला कोई ठोस कारण या साक्ष्य नजर नहीं आता तब तक इस चरण में अंतरिम राहत के मामले में विचार करना उचित नहीं होगा।”

सहकारी बैंकों ने अध्यादेश के उन प्रावधानों पर रोक लगाने का अनुरोध किया था जो सरकारी बैंकों के निगमन, नियमन या उन्हें बंद करने का अधिकार रिजर्व बैंक को देते हैं।

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उच्चतम न्यायालय की एक संवैधानिक पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए सहकारी बैंकों की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता पीएच अरविंद पांडियन ने कहा कि यह मामले पूरी तरह राज्य कानून के दायरे में आते हैं।

वहीं इस दलील का विरोध करते हुए आरबीआई की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ए एल सोमैयाजी ने कहा कि सहकारी समितियां राज्य की विषय वस्तु हो सकती हैं जब वह अन्य गतिविधियां करें। लेकिन जब वे बैंकिंग गतिविधियों में शामिल होती हैं तब वह संसद के दायरे में आती हैं।

पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई एक सितंबर को तय करते हुए केंद्र सरकार और आरबीआई से चार हफ्तों के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

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