नयी दिल्ली, 29 अगस्त जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की पुन: शुरुआत की है जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद नीट-पीजी परीक्षा उत्तीर्ण करके किया जा सकता है।
कम से कम 100 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) से मान्यता के पात्र हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत स्वायत्त इकाई एनबीई ने आठ विशेष क्षेत्रों में एमबीबीएस के बाद के लिए दो साल के डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत की है जिनमें एनेस्थीसियोलॉजी, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनीकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, फेमिली मेडिसिन, ऑप्थेल्मोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस, ईएनटी और टीबी तथा छाती रोग हैं।
भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने 2019 में देश में चिकित्सा शिक्षकों की कमी से उबरने के लिए अपने डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को डिग्री पाठ्यक्रम में तब्दील कर दिया था।
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एनबीई के एक अधिकारी ने कहा कि एमसीआई के डिप्लोमा कोर्स समाप्त होने के बाद पैदा हुए अंतराल को पाटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनबीई को उसके तत्वावधान में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावना पर विचार करने को कहा था।
एनबीई के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर पवनेंद्र लाल ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के दौरान प्राथमिक और द्वितीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की कमजोरियां और खामियां उजागर हो गयीं, इसलिए मेडिकल कॉलेज वाले तृतीय स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर अतिरिक्त बोझ डालकर उन्हें विशेष कोविड देखभाल और उपचार केंद्र बनाया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए ग्रामीण, अर्द्ध-शहरी इलाकों और दूसरे तथा तीसरे स्तर के शहरों में आबादी के लिए अस्पतालों को बढ़ाना अनिवार्य है।’’
नीति आयोग, एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ सिलसिलेवार परामर्श के बाद एनबीई ने डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए रूपरेखा तैयार की और 20 अगस्त को इसकी घोषणा कर दी।
प्रोफेसर लाल ने उम्मीद जताई कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम से जिला अस्पतालों के लिए अधिक प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सकेगा।
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