देश की खबरें | नेटफ्लिक्स पर फिल्म ‘गुंजन सक्सेना’ के खिलाफ याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर देखे केंद्र: अदालत
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नयी दिल्ली, 28 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह नेटफ्लिक्स पर दिखाई जा रही फिल्म ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’ पर रोक के लिये दायर जनहित याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर देखे।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भारतीय वायुसेना की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया।
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अदालत ने कहा, “अपनी प्रतिष्ठा की सुरक्षा के लिये सशस्त्र बल पूरी तरह सक्षम हैं” और अगर वायुसेना को कोई आपत्ति है तो “उन्हें इसे उठाने दीजिए”।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने जाह्नवी कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर याचिका को निस्तारित कर दिया।
पीठ ने कहा, “एक फिल्म या किताब को लेकर इतनी संवेदनशीलता क्यों? क्या हमारे संस्थान इतने कमजोर हैं?”
पीठ ने यह भी पूछा कि इस दावे का कानूनी आधार क्या है कि वायुसेना की अच्छी छवि ही पेश की जानी है अन्यथा नहीं।
अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह इस प्रतिवेदन पर कानून, नियमों और इस मामले में लागू सरकारी नीति के मुताबिक फैसला करे।
जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन नाम के एनजीओ ने फिल्म के निर्माताओं को उन दृश्यों को बदलने या हटाने का निर्देश देने की मांग की थी जिनमें भारतीय वायुसेना की छवि को कथित रूप से सही से नहीं पेश किया गया है।
इसमें आरोप लगाया गया कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक और वायुसेना में अनुचित कार्य संस्कृति की तस्वीर पेश करते हैं ताकि पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना के फिल्मी किरदार को महिमामंडित किया जा सके।
एनजीओ ने यह भी दावा किया कि फिल्म में वायुसेना और उसके कुछ अधिकारियों को लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त दर्शाया गया है।
संगठन ने अदालत को बताया कि शुरुआती समझ के मुताबिक फिल्म का निर्माण करने वाले धर्मा प्रोडक्शन ने प्रमाणिकता के साथ वायुसेना का पक्ष रखने और यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास करने का वादा किया था कि यह फिल्म अगली पीढ़ी के वायुसेना अधिकारियों को प्रेरित करने में मदद करेगी।
इस पर अदालत ने कहा कि वायुसेना अगर संतुष्ट नहीं है तो उन्हें कार्रवाई करने दीजिए।
पीठ ने कहा, “वायुसेना स्थिति से अवगत है। उन्हें कार्रवाई करने दीजिए।”
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