देश की खबरें | जनगणना, एनपीआर की कवायद इस साल भी होने की संभावना नहीं; अंतरिम बजट में 1,277 करोड़ रुपये मिले

नयी दिल्ली, एक फरवरी वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में जनगणना के लिए 1,277.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 2021-22 के आवंटन की तुलना में काफी कम हैं जब 3,768 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि तीन साल की देरी के बाद भी इस साल इसे कराये जाने की संभावना नहीं है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की 24 दिसंबर, 2019 को हुई बैठक में 8,754.23 करोड़ रुपये की लागत से भारत की जनगणना-2021 करने और 3,941.35 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को अद्यतन करने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया था।

जनगणना में आवास की सूची बनाने का चरण और एनपीआर को अद्यतन करने की कवायद 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक देश भर में की जानी थी, लेकिन कोविड​​-19 के कारण स्थगित कर दी गई।

सरकार ने अभी तक जनगणना के नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है।

अधिकारियों ने कहा कि आम चुनाव इस साल होने वाले हैं, इसलिए 2024 में जनगणना होने की संभावना नहीं लगती।

अंतरिम बजट के अनुसार, जनगणना सर्वे और सांख्यिकी के लिए 1,277.80 करोड़ रुपये का आवंटन किये गये हैं, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए यह आवंटन 520.96 करोड़ रुपये का किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, जनगणना और एनपीआर की पूरी कवायद पर सरकार को 12,000 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ सकता है।

यह कवायद जब भी होगी, पहली डिजिटल जनगणना होगी जिसमें नागरिकों को स्वयं हिस्सेदारी करके जानकारी देने का अवसर मिलेगा।

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