नयी दिल्ली, आठ जुलाई लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने बुधवार को, कुछ अध्यायों को हटाकर अपने पाठ्यक्रम में कटौती करने के सीबीएसई के कदम की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर “एकपक्षीय और अलोकतांत्रिक कदम” उठाने का आरोप लगाया।
उन्होंने एक बयान में आरोप लगाया, “मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, सरकार ने कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर 2020-21 के शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिये पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत कटौती की आड़ में कुछ महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाने का फैसला किया है। यह एकपक्षीय और अलोकतांत्रिक कदम है। मैं कहूंगा कि यह देश में लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में एक कदम है।”
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बोर्ड परीक्षाओं में अगले साल शामिल होने वाले विद्यार्थियों को धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता, नोटबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में पढ़ने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि इन विषयों से संबंधित पाठों तथा कई अन्य पाठों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
बोर्ड ने कहा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर छात्रों का पढ़ाई का बोझ कम करने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
यादव ने पूछा कि कोई छात्र संघवाद पर पाठ के बिना भारत के संविधान को कैसे समझ सकता है और सामाजिक आंदोलन को समझे बिना कोई देश का इतिहास कैसे समझ सकता है।
विपक्षी नेता ने सरकार से अनुरोध किया कि सभी दलों, बुद्धिजीवियों और अन्य पक्षकारों से परामर्श के बाद ही माध्यमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में कोई बदलाव किया जाए।
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