देश की खबरें | सीबीआई ने सीएमपीएफओ में क्लर्क नियुक्ति की जांच शुरू की, परीक्षा में बैठे थे मुन्ना भाई
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नयी दिल्ली, 17 जुलाई सीबीआई ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) में लोअर डिवीजन क्लर्क के तौर पर 13 लोगों की नियुक्ति के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि इन लोगों के बदले मुन्ना भाई की तरह छद्म उम्मीदवार परीक्षा में बैठे थे ।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने 2014 में एलडीसी के तौर पर 13 लोगों की नियुक्ति के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है। ये सभी वर्तमान में विभिन्न कार्यालयों में सामाजिक सुरक्षा सहायक के तौर पर काम कर रहे हैं । अपने बदले किसी दूसरे उम्मीदवार को इन्होंने परीक्षा में बैठाया था ।
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वर्ष 2014 में सीएमपीएफओ ने एलडीसी की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया। इसके तहत उम्मीदवारों को इन्स्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) द्वारा आयोजित ऑनलाइन लिखित परीक्षा में हिस्सा लेना था।
मेधा सूची के आधार पर चुने गए उम्मीदवारों को सीएमपीएफओ अधिकारियों की मौजूदगी में एडसिल (इंडिया) लिमिटेड, नोएडा द्वारा आयोजित ऑनलाइन दक्षता (टाइपिंग) परीक्षा में हिस्सा लेना था ।
उन्होंने बताया कि यह धांधली तब हुई जब एडसिल ने सीएमपीएफओ को बताया कि 10 उम्मीदवार अपनी पहचान साबित नहीं कर पाए और बाद में सात ने स्वीकार किया कि वे असली उम्मीदवार नहीं हैं जबकि तीन ने जोर दिया कि वे ही असली उम्मीदवार हैं और उन्हें सीएमपीएफओ अधिकारियों की सहमति के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गयी ।
सतर्कता विभाग से मिली शिकायत में कहा गया, ‘‘एडसिल (इंडिया) लिमिटेड के अधिकारियों ने सीएमपीएफओ को पद पर अंतिम चयन या नियुक्ति के पहले उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यान कर लेने को कहा था।’’ इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच शुरू की ।
उन्होंने बताया कि एडसिल द्वारा आगाह किए जाने के बाद सतर्कता विभाग ने प्रक्रिया में चयनित और नियुक्त सभी उम्मीदवारों को अंगूठे का निशान देने को कहा और आंतरिक जांच शुरू की ।
बाद में पता चला कि 13 उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान का मेल नहीं हो पाया ।
शिकायत में कहा गया, ‘‘यह साफ है कि अज्ञात लोग जाली तरीके से छद्म उम्मीदवार के तौर पर ऑनलाइन लिखित परीक्षा दक्षता टेस्ट में शामिल हुए और बाद में ये उम्मीदवार सीएमपीएफओ में एलडीसी के पद पर चयनित हो गए। इस तरह योग्य उम्मीदवारों को वंचित कर सीएमपीएफओ के साथ जालसाजी की गयी।’’
बाद में प्राथमिकी दर्ज करने और जालसाजी के संबंध में विस्तृत जांच करने की सिफारिश की गयी ।
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