देश की खबरें | सीबीआई दो सप्ताह बाद भी रिश्वतखोरी के आरोपी आईआरएस अधिकारी को नहीं खोज सकी

अहमदाबाद, 26 अक्टूबर भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी द्वारा बिल्डर से 30 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप से जुड़े मामले को संभाले हुए केन्द्रीय जांच ब्यूरो को दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन एजेंसी अभी भी आरोपी अधिकारी का पता नहीं लगा सकी है।

अवर आयकर आयुक्त के रूप में नियुक्त आईआरएस अधिकारी संतोष करनानी पर शहर के एक बिल्डर रूपेश ब्रह्मभट्ट से रिश्वत लेने का आरोप है।

सीबीआई के भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक एस. एस. भदौरिया ने बताया, ‘‘मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले करनानी अभी भी फरार हैं और हमारी जांच में शामिल नहीं हुए हैं।’’

गौरतलब है कि ब्रह्मभट तीन अक्टूबर को अपनी शिकायत लेकर पहले गुजरात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो गए थे।

उनकी शिकायत के अनुसार, आयकर विभाग ने उनके दफ्तरों की तलाशी ली थी और एक अपरेजल रिपोर्ट बनाकर उसे अहमदाबाद के केन्द्रीय सर्किल-1 को सौंप दिया था ताकि वे ‘डिमांड नोटिस’ जारी कर सकें।

प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला करनानी के पास पहुंचा, जिन्होंने ‘‘इसमें कुछ नहीं करने के एवज में’’ कथित रूप से 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी क्योंकि ‘‘कार्रवाई से शिकायतकर्ता को बहुत वित्तीय नुकसान होता।’’

अधिकारी ने ब्रह्मभट्ट से कथित रूप से रिश्वत की राशि कूरियर कंपनी ‘धारा कूरियर’ के ‘वर्धमान’ के खाते में जमा कराने को कहा।

राज्य एसीबी ने चार अक्टूबर को धारा कूरियर के दफ्तर में जाल बिछाया और बिल्डर द्वारा जमा की गई 30 लाख रुपये की राशि जब्त कर ली।

लेकिन जब एसीबी की टीम करनानी को गिरफ्तार करने आश्रम रोड स्थित आयकर विभाग के कार्यालय पहुंची तो वहां हंगामे की स्थिति थी और करनानी फरार था।

इसके बाद गुजरात सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। केन्द्रीय एजेंसी के गांधीनगर कार्यालय ने करनानी के खिलाफ 12 अक्टूबर को मामला दर्ज किया।

इसबीच, सीबीआई की जांच से पता चला है कि कूरियर कंपनी में वर्धमान के खाते, का कथित मालिक मालव मेहता है।

भदौरिया ने बताया, ‘‘हमने मेहता को जांच के लिए समन भेजा, लेकिन वह अग्रिम जमानत के लिए गुजरात उच्च न्यायालय चला गया है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)