चंडीगढ़, 13 नवंबर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के इलाकों की आबोहवा पर नजर रखने के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार को पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की संख्या में लगभग 71 प्रतिशत की कमी के लिए पंजाब की सराहना की। राज्य सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।
विज्ञप्ति के मुताबिक, सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पराली जलाने से रोकने के उपायों की समीक्षा करने के लिए पंजाब के संबंधित विभागों, उपायुक्तों और जिला पुलिस प्रमुखों के साथ बैठक की।
वर्मा ने इस समस्या को रोकने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा हालांकि अभी भी प्रवर्तन प्रयासों में सुधार करने और पराली जलाने के मामलों को शून्य के स्तर पर लाने की आवश्यकता है।
सीएक्यूएम अध्यक्ष ने कहा कि बैठक के दौरान सभी उपायुक्तों के साथ प्रवर्तन उपायों की समीक्षा की गई और मुख्य रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां पराली जलाने की घटानाएं सबसे अधिक आई है।
उन्होंने ऐसी घटनाओं की दर को शून्य पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वर्मा ने कहा कि सीएक्यूएम स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा तथा प्रवर्तन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय प्राधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगा।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पंजाब में पराली जलाने से रोकने के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि नियमों का पालन करने में ढील नहीं बरती जानी चाहिए तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वर्मा ने अधिकारियों को सलाह दी कि 30 नवंबर तक पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए सक्रिय कदम उठाएं जाएं क्योंकि इस समय पराली जलाने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं।
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